SELF EMPLOYMENT

AgricultureInnovation – रिंग विधि से गन्ने की खेती ने बदली किसान की सोच और कमाई

AgricultureInnovation – जिले के एक प्रगतिशील किसान ने पारंपरिक खेती से हटकर नई तकनीक अपनाते हुए गन्ने की खेती में एक अलग पहचान बनाई है। इस किसान ने पहली बार रिंग विधि का इस्तेमाल कर गन्ने की बुवाई की है, जिसे देखकर आसपास के किसान भी उत्सुक नजर आ रहे हैं। इस पद्धति में गन्ने के पौधों को गोलाकार संरचना में लगाया जाता है, जिससे प्रत्येक पौधे को पर्याप्त दूरी, धूप और हवा मिलती है। किसान का दावा है कि इस तकनीक से उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ सिंचाई के पानी की खपत भी कम होती है।

Agriculture innovation sugarcane ring method

किसान की पृष्ठभूमि और खेती की शुरुआत

जगदंबा प्रसाद वर्मा, जो इस प्रयोग के पीछे हैं, बताते हैं कि उन्होंने केवल पांचवीं कक्षा तक पढ़ाई की। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्हें पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी और खेती को ही अपना मुख्य साधन बनाना पड़ा। समय के साथ उन्होंने खेती में अनुभव हासिल किया और आज वे मुख्य रूप से गन्ने की खेती पर निर्भर हैं। उनका मानना है कि खेती में बदलाव और प्रयोग ही सफलता की कुंजी है, इसलिए वे लगातार नए तरीकों को अपनाने की कोशिश करते रहते हैं।

पारंपरिक तरीके से अलग सोच

जगदंबा प्रसाद बताते हैं कि वे हमेशा कुछ अलग करने में विश्वास रखते हैं। उनका कहना है कि एक ही तरीके से खेती करने के बजाय समय-समय पर नई तकनीकों को अपनाना जरूरी है। इसी सोच के चलते उन्होंने रिंग पिट विधि को अपनाया। उनके अनुसार, इस पद्धति में गन्ने की पौधों को गिरने की संभावना कम होती है और पौधे अधिक मजबूत और लंबे होते हैं। इससे खेत का प्रबंधन भी आसान हो जाता है।

रिंग विधि का विचार कैसे आया

इस नई तकनीक को अपनाने के पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है। जगदंबा प्रसाद बताते हैं कि उन्हें रिंग विधि का विचार यूट्यूब के माध्यम से मिला। उन्होंने एक वीडियो में देखा कि एक किसान विशेष कृषि उपकरण की मदद से गोल गड्ढे बनाकर उसमें गन्ने की बुवाई कर रहा था। इस प्रक्रिया ने उन्हें प्रभावित किया और उन्होंने इसके बारे में और जानकारी जुटाई। जानकारी मिलने के बाद उन्होंने अपने खेत में इस तकनीक को आजमाने का निर्णय लिया।

पहले प्रयोग और वर्तमान स्थिति

जगदंबा प्रसाद के अनुसार, पिछले वर्ष उन्होंने लगभग 25 से 30 बीघा भूमि पर रिंग विधि से गन्ने की खेती की थी। हालांकि इस बार समय की कमी के कारण उन्होंने इस क्षेत्र को कम कर दिया है और करीब एक एकड़ में ही इस पद्धति से बुवाई की है। फिर भी, वे इस तकनीक को लेकर आश्वस्त हैं और आने वाले समय में इसे फिर से बड़े स्तर पर अपनाने की योजना बना रहे हैं।

उत्पादन और लाभ को लेकर उम्मीद

किसान का कहना है कि रिंग विधि से गन्ने की पैदावार पारंपरिक तरीकों की तुलना में अधिक होने की संभावना है। पौधों को संतुलित पोषण और पर्याप्त जगह मिलने के कारण उनकी वृद्धि बेहतर होती है। साथ ही, इस पद्धति में पानी की बचत भी होती है, जो मौजूदा समय में एक महत्वपूर्ण पहलू है। जगदंबा प्रसाद अन्य किसानों को भी इस तकनीक को अपनाने की सलाह देते हैं, ताकि वे भी बेहतर उत्पादन हासिल कर सकें।

किसानों के लिए संदेश

जगदंबा प्रसाद का मानना है कि बदलते समय के साथ खेती के तरीके भी बदलने चाहिए। उनका कहना है कि अगर किसान नई तकनीकों को अपनाने के लिए तैयार हों, तो वे कम संसाधनों में भी बेहतर परिणाम हासिल कर सकते हैं। वे अन्य किसानों को प्रेरित करते हुए कहते हैं कि छोटे स्तर पर ही सही, लेकिन नए प्रयोग जरूर करने चाहिए ताकि खेती अधिक लाभकारी बन सके।

Back to top button