AGRICULTURE

BottleGourdFarming – मुरादाबाद में किसानों के लिए लौकी बनी मुनाफे की फसल

BottleGourdFarming – पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में खेती का रुख तेजी से बदल रहा है। यहां के किसान अब पारंपरिक अनाज फसलों से हटकर नकदी सब्जियों की ओर बढ़ रहे हैं, जिनमें लौकी की खेती ने खास जगह बना ली है। बाजार में पूरे साल इसकी मांग बनी रहने से किसानों को स्थिर आय मिल रही है। यही वजह है कि छोटे और मध्यम किसान भी अब इस फसल को अपनाकर अपनी आमदनी बढ़ाने की दिशा में कदम उठा रहे हैं।

Bottle gourd farming profit moradabad

कम लागत में बेहतर उत्पादन का विकल्प

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, लौकी की खेती उन फसलों में शामिल है जिनमें शुरुआती निवेश अपेक्षाकृत कम होता है। मुरादाबाद के कृषि वैज्ञानिक डॉ. दीपक मेहंदीरत्ता बताते हैं कि एक हेक्टेयर में इस फसल को तैयार करने में लगभग 20 से 25 हजार रुपये तक का खर्च आता है। इसके मुकाबले उत्पादन 25 से 30 टन तक पहुंच सकता है, जो किसानों के लिए अच्छा आर्थिक अवसर बनाता है। यदि बाजार में सामान्य दर भी मिल जाए, तो किसान प्रति हेक्टेयर 1 से 2 लाख रुपये तक का शुद्ध लाभ कमा सकते हैं। जैविक खाद का उपयोग और मचान विधि अपनाने से फलों की गुणवत्ता सुधरती है, जिससे बाजार में बेहतर कीमत मिलती है।

पॉली हाउस तकनीक से बढ़ता फायदा

विशेषज्ञ मानते हैं कि आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से इस खेती को और अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है। पॉली हाउस तकनीक के जरिए किसान पहले से स्वस्थ पौध तैयार कर सकते हैं, जिससे फसल जल्दी तैयार होती है। इससे अगेती उत्पादन संभव होता है और बाजार में ऊंचे दाम मिलने की संभावना बढ़ जाती है। एक हेक्टेयर के लिए लगभग 4 से 5 किलो उन्नत बीज पर्याप्त माने जाते हैं। जिन किसानों के पास पॉली हाउस की सुविधा नहीं है, वे सीधे खेत में भी पौध तैयार कर सकते हैं, लेकिन समय और देखभाल पर विशेष ध्यान देना जरूरी होता है।

सही दूरी और रोपण से बेहतर परिणाम

लौकी की खेती में पौधों के बीच संतुलित दूरी रखना बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों के मुताबिक, पंक्ति से पंक्ति के बीच लगभग ढाई मीटर का अंतर होना चाहिए, जबकि पौधों के बीच 75 से 100 सेंटीमीटर की दूरी उपयुक्त रहती है। इस तरीके से रोपण करने पर बेलों को फैलने के लिए पर्याप्त जगह मिलती है और पौधों को धूप व हवा सही मात्रा में मिलती है। इससे कीट और रोगों का खतरा कम होता है और फल एकसमान आकार के विकसित होते हैं, जो बाजार में ज्यादा पसंद किए जाते हैं।

साल भर मांग से मिलती स्थिर आय

लौकी ऐसी सब्जी है जिसकी मांग मौसम के अनुसार कम-ज्यादा जरूर होती है, लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं होती। स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं के बीच इसकी लोकप्रियता लगातार बनी हुई है। यही कारण है कि मंडियों में इसकी नियमित बिक्री होती रहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान समय पर बुवाई करें और वैज्ञानिक तरीकों का पालन करें, तो उन्हें लगातार अच्छी आय मिल सकती है। इस फसल ने कई किसानों को कम समय में आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई है।

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