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Cultivation Success Story – बोकारो के इस किसान ने खोले लौकी से कमाई के नए रास्ते

Cultivation Success Story – झारखंड के बोकारो जिले के पेटरवार प्रखंड स्थित बांगा गांव में इन दिनों एक किसान की मेहनत चर्चा का विषय बनी हुई है। प्रगतिशील किसान जागु महतो ने लौकी की खेती में आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर अच्छी आय हासिल की है। पारंपरिक खेती से आगे बढ़ते हुए उन्होंने मल्चिंग और मचान विधि अपनाई, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार हुआ। आसपास के किसान भी अब उनकी पद्धति को समझने और अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं।

Bokaro bottle gourd farming profit

परंपरा से आधुनिक तकनीक तक का सफर

जागु महतो बताते हैं कि वे एक किसान परिवार से हैं और खेती उनके लिए सिर्फ पेशा नहीं, बल्कि विरासत है। पहले पारंपरिक तरीके से खेती होती थी, लेकिन मौसम की अनिश्चितता और बढ़ती लागत ने उन्हें नए प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने लौकी की खेती में प्लास्टिक मल्चिंग शीट और मचान संरचना का उपयोग शुरू किया। इस विधि से बेल जमीन पर फैलने की बजाय ऊपर सहारे के साथ बढ़ती है, जिससे फसल को पर्याप्त धूप और हवा मिलती है। साथ ही, जमीन की नमी लंबे समय तक बनी रहती है।

बुवाई से तोड़ाई तक चार महीने का चक्र

स्थानीय थोक बाजार में लौकी की कीमत 20 से 35 रुपये प्रति किलो के बीच रहती है। यदि औसतन 20 रुपये प्रति किलो का भाव भी माना जाए, तो चार महीने में कुल बिक्री दो लाख रुपये तक पहुंच सकती है। लागत घटाने के बाद भी अच्छा मुनाफा बचता है। जागु महतो का कहना है कि सही तकनीक और समय पर देखभाल से सब्जी की खेती लाभदायक साबित हो सकती है, बशर्ते किसान बाजार की मांग को समझें और फसल प्रबंधन पर ध्यान दें।

कीट प्रबंधन और सावधानियां

लौकी की फसल में लाही और पत्तों को नुकसान पहुंचाने वाले कीड़ों का खतरा रहता है। ऐसे में समय पर जैविक कीटनाशकों का छिड़काव जरूरी है। जागु महतो रासायनिक दवाओं के बजाय जैविक उपायों को प्राथमिकता देते हैं, जिससे फसल सुरक्षित रहती है और मिट्टी की सेहत भी बनी रहती है। मल्चिंग शीट से खरपतवार कम उगते हैं और सिंचाई की जरूरत भी घटती है। मचान पद्धति से फल जमीन के संपर्क में नहीं आते, जिससे सड़न की आशंका कम हो जाती है।

अन्य किसानों के लिए प्रेरणा

जागु महतो की सफलता ने आसपास के किसानों को नई दिशा दी है। वे मानते हैं कि कम जमीन में भी यदि वैज्ञानिक पद्धति अपनाई जाए तो बेहतर आय संभव है। सब्जी की खेती में निरंतर निगरानी और बाजार से सीधा संपर्क जरूरी है। उनका अनुभव बताता है कि बदलते समय के साथ खेती में भी बदलाव जरूरी है। सही तकनीक, मेहनत और योजना के साथ ग्रामीण क्षेत्र में भी अच्छी कमाई की जा सकती है।

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