AGRICULTURE

Teak Farming – सागवान की खेती से किसानों के लिए खुलेगा लंबी अवधि का लाभ

Teak Farming – पारंपरिक खेती के मुकाबले इमारती पौधों की खेती अब किसानों के बीच एक दीर्घकालिक निवेश के रूप में पहचान बना रही है। खासकर सागवान जैसे पेड़ों की खेती को लेकर ग्रामीण इलाकों में रुचि बढ़ी है। यह खेती तुरंत मुनाफा नहीं देती, लेकिन समय के साथ बड़ी पूंजी में बदल सकती है। जिन किसानों के पास सीमित जमीन है, वे भी योजनाबद्ध तरीके से इसे अपनाकर भविष्य के लिए मजबूत आर्थिक आधार तैयार कर सकते हैं।

Teak farming long term farmer pro

पलामू के किसान की पहल

झारखंड के पलामू जिले के किसान तारकेश्वर सिंह चेरो ने सागवान की खेती को अपनाकर एक अलग रास्ता चुना। उनका कहना है कि यदि एक बीघा जमीन में सागवान के पौधे लगाए जाएं और उनकी सही देखभाल की जाए, तो 20 वर्षों में उल्लेखनीय आय संभव है। उनके अनुसार यह किसी लंबी अवधि के निवेश की तरह है, जिसमें शुरुआती वर्षों में धैर्य रखना जरूरी होता है।

वे बताते हैं कि एक बीघा में करीब 500 या उससे अधिक पौधे लगाए जा सकते हैं। यदि वर्षों बाद प्रत्येक पेड़ से अच्छी कीमत मिलती है, तो कुल आय करोड़ों रुपये तक पहुंच सकती है। हालांकि यह आकलन बाजार की स्थिति और लकड़ी की गुणवत्ता पर निर्भर करता है।

पांच एकड़ में सागवान का उदाहरण

तारकेश्वर सिंह ने लगभग 15 साल पहले अपनी पांच एकड़ जमीन में करीब 1500 सागवान के पौधे लगाए थे। उनका कहना है कि अब ये पेड़ परिपक्वता की ओर बढ़ रहे हैं और इनकी संभावित कीमत काफी अधिक आंकी जा रही है। उन्होंने अभी बिक्री नहीं की है, क्योंकि उनका मानना है कि समय के साथ इनकी कीमत और बढ़ सकती है।

इस तरह की खेती में शुरुआती वर्षों में सिंचाई, सुरक्षा और नियमित देखभाल पर ध्यान देना पड़ता है। लेकिन एक बार पेड़ मजबूत हो जाएं तो लागत अपेक्षाकृत कम रह जाती है।

बाजार में सागवान की मांग

लकड़ी के बाजार में सागवान की मांग लंबे समय से बनी हुई है। फर्नीचर उद्योग में इसकी उपयोगिता के कारण इसकी कीमत स्थिर रहती है। जानकारों के अनुसार, गुणवत्ता के आधार पर सागवान की लकड़ी की दरें अलग-अलग हो सकती हैं। एक परिपक्व पेड़ से पर्याप्त मात्रा में उपयोगी लकड़ी प्राप्त होती है, जिससे अच्छी आय की संभावना रहती है।

हालांकि विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि खेती शुरू करने से पहले स्थानीय बाजार, परिवहन और कानूनी नियमों की जानकारी लेना जरूरी है।

छोटे स्तर पर भी संभावनाएं

किसान बताते हैं कि यदि कोई व्यक्ति सीमित संख्या में भी सागवान के पेड़ लगाए और लंबे समय तक उनका संरक्षण करे, तो भविष्य में यह अतिरिक्त संपत्ति का स्रोत बन सकता है। उदाहरण के तौर पर, 100 पेड़ों का रोपण भी दीर्घकाल में उल्लेखनीय लाभ दे सकता है।

इस मॉडल में सबसे महत्वपूर्ण बात धैर्य और निरंतर देखभाल है। जल्द लाभ की अपेक्षा रखने वालों के लिए यह विकल्प उपयुक्त नहीं माना जाता।

व्यक्तिगत उपयोग में भी फायदा

तारकेश्वर सिंह ने अपने खेत में उगे सागवान से घर के लिए फर्नीचर भी तैयार कराया। उनका कहना है कि इससे बाजार मूल्य की तुलना में खर्च कम पड़ा। इस तरह किसान न केवल बिक्री से बल्कि घरेलू उपयोग में भी लाभ प्राप्त कर सकता है।

सरकारी प्रोत्साहन और भविष्य

सरकार भी बागवानी और इमारती पौधों की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए योजनाएं चला रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि पारंपरिक फसलों के साथ यदि किसान सागवान जैसे पेड़ लगाएं, तो जोखिम विभाजन के साथ दीर्घकालिक स्थिरता हासिल की जा सकती है।

तारकेश्वर सिंह का अनुभव यह दर्शाता है कि सही योजना, समय और देखभाल के साथ इमारती पौधों की खेती किसानों के लिए भविष्य का मजबूत आर्थिक सहारा बन सकती है।

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