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Farmer Success Story: MBA पास किसान ने देवघर की बंजर जमीन पर उगाई स्ट्रॉबेरी, अब कर रहे हैं लाखों की कमाई

Farmer Success Story: झारखंड के देवघर जिले से करीब 30 किलोमीटर दूर बसवरिया गांव की मिट्टी आज एक नई सफलता की कहानी कह रही है। यहाँ के एक शिक्षित किसान ने यह साबित कर दिया है कि यदि संकल्प दृढ़ हो, तो किस्मत की लकीरें बदली जा सकती हैं। उन्हें विरासत में जो जमीन मिली थी, वह पूरी तरह पथरीली और बंजर थी, जहाँ घास का एक तिनका उगना भी मुश्किल था। लेकिन अपनी सूझबूझ से उन्होंने इस (Agricultural Land Transformation) को हकीकत में बदल दिया। आज वही बंजर भूमि स्ट्रॉबेरी की लाल और रसीली फसलों से लहलहा रही है, जिसे देखकर आस-पास के ग्रामीण और कृषि विशेषज्ञ भी दंग हैं।

Farmer success story

एमबीए की डिग्री छोड़ खेती को बनाया करियर का आधार

इस प्रगतिशील किसान की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने अकाउंट्स में ग्रेजुएशन करने के बाद डिस्टेंस एजुकेशन से एमबीए (MBA) की पढ़ाई पूरी की है। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद जहाँ युवा अक्सर बड़े शहरों में कॉर्पोरेट नौकरियों के पीछे भागते हैं, वहीं इन्होंने अपनी जड़ों की ओर लौटने का फैसला किया। उनका मानना था कि (Self Employment Generation) के जरिए न केवल खुद को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाया जा सकता है, बल्कि समाज के अन्य लोगों को भी सहारा दिया जा सकता है। इसी सकारात्मक सोच ने उन्हें पारंपरिक खेती के बजाय कुछ आधुनिक करने की प्रेरणा दी।

साल 2021 में शुरू हुआ स्ट्रॉबेरी की खेती का सफर

खेती की शुरुआत करना इनके लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था। साल 2021 में जब उन्होंने पहली बार स्ट्रॉबेरी उगाने का फैसला लिया, तो जमीन की गुणवत्ता सबसे बड़ी बाधा थी। बिना किसी सरकारी सब्सिडी या विशेष तकनीकी सहायता के उन्होंने अपने दम पर मिट्टी की उर्वरता सुधारने का काम शुरू किया। सिंचाई के लिए आधुनिक (Drip Irrigation System) और खाद प्रबंधन के वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर उन्होंने बंजर भूमि को उपजाऊ बनाया। देखते ही देखते उनकी मेहनत रंग लाई और छोटे से प्रयोग ने एक बड़े व्यावसायिक मॉडल का रूप ले लिया।

सात एकड़ में फैली स्ट्रॉबेरी की लाल फसल

शुरुआत में छोटे स्तर पर काम करने के बाद आज यह किसान लगभग 7 एकड़ के विशाल क्षेत्र में स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहे हैं। बाजार में इनकी स्ट्रॉबेरी की मांग इतनी अधिक है कि स्थानीय मंडियों के साथ-साथ दूसरे जिलों के व्यापारी भी इनसे संपर्क कर रहे हैं। इस (Cash Crop Cultivation) ने उनकी आर्थिक स्थिति को पूरी तरह बदल दिया है। वह अब न केवल अपनी आजीविका चला रहे हैं, बल्कि खेती के आधुनिक उपकरणों और उन्नत बीजों में निवेश कर अपने कारोबार का विस्तार भी कर रहे हैं, जो उनकी मेहनत का जीता-जागता प्रमाण है।

25 ग्रामीणों को रोजगार देकर पेश की अनूठी मिसाल

इस सफल स्टार्टअप का सबसे सुखद पहलू यह है कि इससे गांव में रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं। वर्तमान में यह किसान गांव के लगभग 25 युवक-युवतियों को नियमित रूप से काम दे रहे हैं। खेती की कटाई, पैकेजिंग और रखरखाव के कार्य में स्थानीय लोग जुड़कर आत्मनिर्भर बन रहे हैं। (Rural Community Empowerment) की दिशा में यह एक बड़ा कदम है, जिससे गांव से होने वाले पलायन में भी कमी आई है। गांव के लोग अब अपनी जमीन और अपने लोगों के बीच रहकर सम्मानजनक कमाई कर पा रहे हैं।

युवाओं और नए स्टार्टअप्स के लिए प्रेरणा स्रोत

बसवरिया गांव के इस किसान की सफलता आज उन सभी शिक्षित युवाओं के लिए एक बड़ा सबक है जो खेती को पिछड़ा हुआ काम मानते हैं। उन्होंने दिखाया है कि (Modern Farming Innovation) के साथ अगर मेहनत की जाए, तो खेती किसी भी सफेदपोश नौकरी से कहीं अधिक मुनाफा दे सकती है। आज वे पूरे जिले में एक ‘रोल मॉडल’ के रूप में उभरे हैं। उनकी यह यात्रा स्पष्ट करती है कि संसाधन कम होने पर भी अगर हौसला बड़ा हो, तो बंजर जमीन से भी सोना उगाया जा सकता है।

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