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Women Farmer’s Success Story: 10000 की सरकारी मदद से महिला ने पलटी अपनी किस्मत, इस चीज की खेती से कमाया नाम…

Women Farmer’s Success Story: बिहार के दरभंगा जिले में इन दिनों एक महिला किसान की चर्चा हर जुबान पर है। रामनगर क्षेत्र की रहने वाली रामकला देवी ने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे फौलादी हों, तो छोटी सी सरकारी मदद भी बड़ी कामयाबी की बुनियाद बन सकती है। उन्होंने सरकार द्वारा जीविका योजना के तहत मिली ₹10,000 की राशि को फिजूलखर्ची में उड़ाने के बजाय (Self-Reliant Women) के अपने सपने को पूरा करने के लिए मिट्टी में निवेश कर दिया। आज उनकी मेहनत खेतों में लहलहा रही फसल के रूप में दिखाई दे रही है, जो जल्द ही उनकी आर्थिक स्थिति को बदलने वाली है।

Women farmer's success story

चुनावी वादे से निकली आर्थिक क्रांति की असली कहानी

अक्सर चुनावी घोषणाएं कागजों तक सीमित रह जाती हैं, लेकिन रामकला देवी के मामले में यह हकीकत बनकर उभरी है। चुनाव से पहले महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए (Government Financial Assistance) के रूप में दी गई इस राशि ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई जान फूंक दी है। रामकला देवी का मानना है कि महिलाओं के लिए खेती से बेहतर और कोई स्थायी जरिया नहीं हो सकता। उन्होंने इस पैसे का सदुपयोग करते हुए अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का एक नया मार्ग प्रशस्त किया है।

13 कट्ठा जमीन पर बिछी मसूर की सुनहरी चादर

अपनी दूरदर्शी सोच के साथ रामकला देवी ने लगभग 13 कट्ठा जमीन पर मसूर की खेती करने का फैसला लिया। उन्होंने (Agricultural Investment) को ध्यान में रखते हुए ₹150 प्रति किलो की दर से उन्नत किस्म के बीज खरीदे और पूरी राशि को फसल की तैयारी में लगा दिया। बुवाई से लेकर सिंचाई तक, उन्होंने हर कदम पर वैज्ञानिक प्रबंधन और कड़ी मेहनत का समन्वय किया है। उनका यह कदम दिखाता है कि सीमित संसाधनों में भी अगर सही योजना हो, तो कृषि को लाभ का सौदा बनाया जा सकता है।

पसीने से सींची गई फसल अब देगी बंपर मुनाफा

खेतों में दिन-रात की गई निगरानी और निराई-गुड़ाई का असर अब साफ दिखने लगा है। रामकला देवी को उम्मीद है कि जब फसल तैयार होगी, तो बाजार में (Pulse Farming Profit) के तौर पर उन्हें ₹90 से ₹100 प्रति किलो का भाव आसानी से मिल जाएगा। यह मुनाफा न केवल उनके निवेश की भरपाई करेगा, बल्कि उन्हें भविष्य में बड़े पैमाने पर खेती करने का साहस भी प्रदान करेगा। उनका आत्मविश्वास यह दर्शाता है कि ग्रामीण महिलाएं अब केवल श्रम तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे बाजार के उतार-चढ़ाव को भी बखूबी समझने लगी हैं।

मौसम की मेहरबानी और भविष्य की बड़ी योजनाएं

खेती हमेशा जोखिमों से भरी होती है, लेकिन रामकला देवी का हौसला अडिग है। वे कहती हैं कि यदि इस बार (Sustainable Farming) के अनुकूल मौसम रहा और पैदावार उम्मीद के मुताबिक हुई, तो वे अगले सीजन में खेती का रकबा और बढ़ाएंगी। सरकारी सहायता ने उन्हें शुरुआती धक्का तो दिया, लेकिन अब वे अपनी काबिलियत के दम पर आगे बढ़ने को तैयार हैं। यह केवल एक महिला की कहानी नहीं है, बल्कि बिहार की बदलती कृषि व्यवस्था और महिलाओं के बढ़ते रसूख का प्रमाण है।

जीविका योजना बनी ग्रामीण महिलाओं का मजबूत सुरक्षा कवच

रामकला देवी जैसी हजारों महिलाओं के लिए जीविका योजना आज किसी वरदान से कम नहीं है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए (Rural Development Schemes) का सही क्रियान्वयन कैसे समाज को बदल सकता है, यह दरभंगा की इस घटना से समझा जा सकता है। जो महिलाएं पहले छोटी-छोटी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर थीं, वे आज न केवल अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था में भी सक्रिय योगदान दे रही हैं।

प्रेरणा का स्रोत बनी रामकला की यह संघर्ष गाथा

अंततः, यह कहानी उन सभी लोगों के लिए एक सबक है जो संसाधनों की कमी का रोना रोते हैं। रामकला देवी ने दिखाया है कि सरकार की (Financial Literacy for Farmers) और कड़ी मेहनत मिलकर चमत्कार कर सकती है। आज दरभंगा की इस बेटी की सफलता न केवल कृषि क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रही है, बल्कि समाज की उस सोच को भी बदल रही है जो महिलाओं को केवल घर की चारदीवारी तक सीमित मानती थी। जीविका दीदियों का यह बढ़ता कदम राज्य की खुशहाली का नया अध्याय लिख रहा है।

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