AGRICULTURE

Agriculture tips: धान के बाद रबी सीजन में छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए लाभकारी खेती के नए रास्ते

Agriculture tips: धान की कटाई पूरी होते ही छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में खेतों की रौनक एक बार फिर लौटने लगी है। अब किसान रबी मौसम की तैयारी में जुट गए हैं। बीते कुछ वर्षों में मौसम में आए बदलाव, खेती की बढ़ती लागत और सीमित मुनाफे ने किसानों को यह सोचने पर मजबूर किया है कि परंपरागत फसलों के साथ-साथ कुछ नए विकल्प भी अपनाए जाएं। इसी कारण अब बड़ी संख्या में किसान ऐसी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं, जिनसे कम खर्च में बेहतर आमदनी मिल सके और जमीन की सेहत भी बनी रहे।

Agriculture tips

बदलती खेती और किसानों की नई सोच

आज का किसान सिर्फ पैदावार तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि वह टिकाऊ खेती की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। रबी सीजन में फसल चयन को लेकर जागरूकता बढ़ी है। किसान अब यह समझने लगे हैं कि हर साल एक ही फसल बोने से मिट्टी कमजोर हो जाती है और उत्पादन घटने लगता है। इसी वजह से दलहन और तिलहन जैसी फसलों को अपनाने में रुचि बढ़ी है। यह बदलाव केवल आर्थिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि लंबे समय तक खेती को सुरक्षित रखने के लिए भी जरूरी माना जा रहा है।

सरकारी सलाह और वैज्ञानिकों का सहयोग

राज्य सरकार भी किसानों को फसल विविधता अपनाने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रही है। कृषि विभाग द्वारा समय-समय पर प्रशिक्षण, जानकारी और सलाह दी जा रही है, ताकि किसान सही निर्णय ले सकें। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि किसान मौसम, मिट्टी और उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखकर फसल चुनें, तो नुकसान की आशंका काफी हद तक कम हो सकती है। यही कारण है कि वैज्ञानिक खेतों तक पहुंचकर किसानों को रबी फसलों से जुड़ी उपयोगी जानकारी दे रहे हैं।

दलहन और तिलहन फसलों का महत्व

धान के बाद दलहन और तिलहन की खेती करना कई मायनों में फायदेमंद है। इन फसलों की जड़ों में मौजूद प्राकृतिक तत्व मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाने में मदद करते हैं। इससे खेतों की उर्वरता बनी रहती है और अगली फसल के लिए जमीन तैयार होती है। इसके अलावा इन फसलों में रोग और कीट लगने की संभावना भी अपेक्षाकृत कम होती है। बाजार में इनका अच्छा दाम मिलने से किसानों की आय में भी स्थिरता आती है।

चना खेती के लिए बेहतर विकल्प

रबी मौसम में चना एक भरोसेमंद फसल मानी जाती है। इसकी मांग बाजार में हमेशा बनी रहती है और देखभाल भी अपेक्षाकृत आसान होती है। उन्नत किस्मों का चयन करने से चना की पैदावार और गुणवत्ता दोनों में सुधार किया जा सकता है। कम लागत में अधिक उत्पादन देने वाली किस्में छोटे और मध्यम किसानों के लिए खास तौर पर लाभकारी साबित हो सकती हैं।

सरसों से बढ़ाएं तिलहन उत्पादन

तिलहन फसलों में सरसों का विशेष स्थान है। यह फसल कम समय में तैयार हो जाती है और सिंचाई की आवश्यकता भी सीमित रहती है। छत्तीसगढ़ की जलवायु के अनुसार विकसित किस्में किसानों को बेहतर परिणाम देती हैं। सरसों की खेती से न केवल खाने योग्य तेल की उपलब्धता बढ़ती है, बल्कि अतिरिक्त आमदनी का जरिया भी बनता है। यही कारण है कि रबी सीजन में सरसों का रकबा धीरे-धीरे बढ़ रहा है।

गेहूं की खेती में नई संभावनाएं

रबी मौसम की प्रमुख फसलों में गेहूं का नाम सबसे पहले आता है। आधुनिक खेती के तरीकों और उन्नत बीजों के उपयोग से गेहूं की पैदावार में अच्छी बढ़ोतरी की जा सकती है। सही समय पर बुवाई, संतुलित खाद और उचित सिंचाई से उत्पादन की गुणवत्ता बेहतर होती है। गेहूं की ऐसी किस्में उपलब्ध हैं जो स्वाद, गुणवत्ता और उपज तीनों मामलों में किसानों की उम्मीदों पर खरी उतरती हैं।

सफल रबी खेती के लिए जरूरी सावधानियां

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि रबी सीजन में सफलता के लिए कुछ बुनियादी बातों का ध्यान रखना जरूरी है। खेत की तैयारी सही ढंग से होनी चाहिए, बुवाई समय पर करनी चाहिए और बीज की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही मौसम की जानकारी रखना और जरूरत के अनुसार सिंचाई करना भी अहम है। यदि किसान वैज्ञानिक सलाह के अनुसार खेती करें, तो उत्पादन के साथ-साथ मुनाफा भी बढ़ाया जा सकता है।

आत्मनिर्भर किसान की ओर एक कदम

दलहन, तिलहन और गेहूं जैसी फसलों को अपनाकर छत्तीसगढ़ के किसान आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा सकते हैं। फसल विविधता न केवल जोखिम को कम करती है, बल्कि खेती को लंबे समय तक लाभकारी भी बनाती है। रबी सीजन में सही निर्णय लेकर किसान अपनी मेहनत का पूरा फल पा सकते हैं और आने वाले समय में खेती को एक स्थायी व्यवसाय के रूप में स्थापित कर सकते हैं।

Back to top button