AGRICULTURE

Sugarcane cultivation: में बीज की सही मात्रा और चयन से कैसे बढ़ाएं उत्पादन और मुनाफा

Sugarcane cultivation: गन्ना भारत की प्रमुख नकदी फसलों में शामिल है और लाखों किसानों की आय का मुख्य साधन भी है। इसकी खेती दिखने में जितनी सरल लगती है, उतनी ही तकनीकी भी है। गन्ना की अच्छी पैदावार केवल सिंचाई और खाद पर निर्भर नहीं करती, बल्कि बीज की सही मात्रा, गुणवत्ता और समय पर बुवाई का इसमें बड़ा योगदान होता है। यदि किसान शुरुआत में ही सही निर्णय ले लें, तो पूरी फसल अवधि में बेहतर परिणाम मिलते हैं।

Sugarcane cultivation
Sugarcane cultivation

गन्ना बीज की मात्रा का महत्व

गन्ना बोते समय बीज की मात्रा सबसे अहम भूमिका निभाती है। बहुत कम बीज डालने से खेत में पौधों की संख्या कम रह जाती है, जबकि आवश्यकता से अधिक बीज लगाने पर पौधों में आपसी प्रतिस्पर्धा बढ़ जाती है। दोनों ही स्थितियों में उत्पादन प्रभावित होता है। इसलिए खेत के आकार और बोवाई की विधि के अनुसार बीज की मात्रा तय करना जरूरी है।

एक आंख और दो आंख वाले बीज की मात्रा

यदि किसान एक आंख वाले गन्ने के टुकड़े से बुवाई करते हैं, तो लगभग 10 क्विंटल प्रति एकड़ बीज पर्याप्त माना जाता है। इस विधि में अंकुरण अच्छा होता है और पौधे समान रूप से उगते हैं। वहीं, दो आंख वाले गन्ने के टुकड़े लगाने पर बीज की मात्रा बढ़ जाती है और करीब 18 से 20 क्विंटल प्रति एकड़ बीज की जरूरत पड़ती है। यह विधि उन क्षेत्रों में अधिक अपनाई जाती है, जहां मिट्टी की नमी अच्छी रहती है।

गलत मात्रा में बीज बोने से होने वाले नुकसान

यदि किसान अनुमान के आधार पर बीज की मात्रा तय करते हैं, तो उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है। कम बीज बोने से खेत में खाली जगह रह जाती है, जिससे उत्पादन घट जाता है। वहीं अधिक बीज डालने से रोग फैलने की संभावना बढ़ जाती है और पौधों का विकास रुक सकता है। इसलिए संतुलित मात्रा ही बेहतर परिणाम देती है।

खेत की तैयारी और बुवाई का समय

गन्ना की सफल खेती के लिए खेत की तैयारी बेहद जरूरी है। खेत को गहरी जुताई के बाद समतल करना चाहिए ताकि सिंचाई का पानी समान रूप से पहुंचे। बसंतकालीन और शरदकालीन दोनों मौसमों में गन्ना बोया जाता है। इन दोनों मौसमों में तापमान और नमी का संतुलन अलग होता है, इसलिए बीज की गुणवत्ता और खेत की तैयारी पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

बीज चयन में सावधानी क्यों जरूरी है

बीज का चयन यदि सही नहीं हुआ, तो पूरी मेहनत बेकार हो सकती है। रोगग्रस्त, सड़ा हुआ या कमजोर गन्ना बीज के रूप में इस्तेमाल करने से अंकुरण कम होता है। इससे पौधों की संख्या घटती है और खेत में एकरूपता नहीं बन पाती। स्वस्थ बीज ही अच्छी फसल की नींव होता है।

बीज के लिए गन्ना की सही उम्र

बीज के लिए 9 से 10 महीने पुराना गन्ना सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस उम्र के गन्ने में अंकुरण की क्षमता अधिक होती है और पौधे मजबूत बनते हैं। 11 से 12 महीने पुराना गन्ना अपेक्षाकृत सख्त हो जाता है, जिससे अंकुरण कमजोर पड़ सकता है। बीज लेते समय गन्ने पर लाल धब्बे, सड़न या किसी भी प्रकार का रोग नहीं होना चाहिए।

क्षेत्र विशेष में गन्ना की बढ़ती लोकप्रियता

मध्य भारत के कई हिस्सों में गन्ना अब तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। नर्मदा पट्टी जैसे क्षेत्रों में किसानों ने इसे अपनाकर अच्छी आमदनी प्राप्त की है। पहले जहां किसान गेहूं और चना जैसी फसलें उगाते थे, अब वे गन्ना की ओर रुख कर रहे हैं। इसका मुख्य कारण है इसकी स्थिर मांग और बाजार में आसानी से बिक्री।

गन्ना की खेती से होने वाला आर्थिक लाभ

गन्ना की मांग केवल चीनी तक सीमित नहीं है। गुड़, खांडसारी और जैव ईंधन उद्योग में भी इसका उपयोग होता है। शुगर मिलों की उपलब्धता के कारण किसानों को अपनी उपज बेचने में परेशानी नहीं होती। भुगतान की निश्चितता और उत्पादन की मात्रा इसे अन्य फसलों की तुलना में अधिक लाभकारी बनाती है।

उपज बढ़ाने के लिए किसानों के लिए सुझाव

किसानों को चाहिए कि वे प्रमाणित स्रोत से ही बीज लें। बुवाई से पहले बीज का उपचार करें ताकि रोगों से बचाव हो सके। खेत में जल निकास की उचित व्यवस्था रखें, क्योंकि पानी भराव से अंकुरण प्रभावित होता है। समय पर निराई गुड़ाई और संतुलित खाद का प्रयोग भी पैदावार बढ़ाने में सहायक होता है।

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