Success Story of Pilot Turned Farmer: अमेरिका की लग्जरी लाइफ त्यागकर भारत के खेतों में ‘सोना’ उगा रहा है यह किसान
Success Story of Pilot Turned Farmer: सफलता का असली अर्थ अक्सर लोग ऊंचे ओहदों और डॉलर में मिलने वाली सैलरी से जोड़ते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में एक ऐसी शख्सियत है जिसने इन तमाम पैमानों को झुठला दिया है। अमेरिका जैसे विकसित देश में एक कमर्शियल पायलट के तौर पर बादलों से बातें करने वाले राघव शरद देवस्थले ने जब अपनी (Success Story of Pilot) को नया मोड़ दिया, तो हर कोई हैरान रह गया। लाखों रुपये की मासिक आय और विदेशों की चकाचौंध को छोड़कर एक पायलट का हल थाम लेना कोई साधारण बात नहीं थी। यह कहानी उस संकल्प की है जिसने साबित कर दिया कि असली संतोष मिट्टी की सेवा में ही छिपा है।

एक छोटे से बच्चे के सवाल ने बदल दी जिंदगी की दिशा
राघव शरद की जिंदगी में बदलाव का वह क्षण उत्तराखंड में आई एक प्राकृतिक आपदा के राहत कार्य के दौरान आया। उन्होंने एक ऐसी घटना देखी जहाँ एक मासूम बच्चा यह स्वीकार करने में शर्म महसूस कर रहा था कि उसके पिता एक किसान हैं। इस (Emotional Decision for Farming) ने शरद के दिल को झकझोर कर रख दिया। उन्होंने महसूस किया कि जिस अन्नदाता के दम पर दुनिया टिकी है, उसके प्रति समाज और नई पीढ़ी का यह नजरिया बदलना बेहद जरूरी है। उसी पल उन्होंने फैसला किया कि वे खुद किसान बनेंगे और इस पेशे को सम्मान दिलाएंगे।
सात समंदर पार से खरगोन के छोटे से गांव तक का सफर
राघव शरद का जन्म छत्तीसगढ़ के रायपुर में हुआ और उनकी जड़ें महाराष्ट्र से जुड़ी हैं, लेकिन उन्होंने अपनी कर्मभूमि के रूप में मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के ग्राम मतमुर को चुना। अमेरिका में अपनी (Pilot Career Sacrifice) के बाद जब वे भारत लौटे, तो उन्होंने सीधे खेतों का रुख किया। शुरुआत आसान नहीं थी, लेकिन उनके पास एक विजन था। उन्होंने पारंपरिक फसलों के बजाय कुछ नया करने की सोची और आर्गेनिक फार्मिंग की नींव रखी, जो आगे चलकर उनकी पहचान बनने वाली थी।
लेमन ग्रास और तुलसी की खेती से शुरू हुआ नया अध्याय
आज से लगभग 5 साल पहले शरद ने अपनी जमीन पर तुलसी और लेमन ग्रास की खेती शुरू की थी। उन्होंने महसूस किया कि औषधीय पौधों की मांग बाजार में लगातार बढ़ रही है। अपनी (Organic Farming in India) के माध्यम से उन्होंने रसायनों का त्याग किया और पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से फसल उगाना शुरू किया। पायलट की ट्रेनिंग में सीखी गई बारीकियों और अनुशासन का इस्तेमाल उन्होंने कृषि की बारीकियों को समझने में किया, जिससे फसल की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय मानकों के समकक्ष हो गई।
सोलर ड्रायर तकनीक से वैल्यू एडिशन का स्मार्ट तरीका
राघव केवल फसल उगाकर उसे कच्चा नहीं बेचते, बल्कि उन्होंने अपनी तकनीकी सूझबूझ का इस्तेमाल करते हुए एक प्रोसेसिंग यूनिट भी स्थापित की है। वे (Solar Dryer Technology) की मदद से अपनी फसलों को सुखाते हैं और उनसे विभिन्न प्रकार के हर्बल प्रोडक्ट्स तैयार करते हैं। यह तकनीक न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि उत्पादों के पोषक तत्वों को भी सुरक्षित रखती है। सीधे खेत से बाजार तक के इस सफर ने उनकी आय को कई गुना बढ़ा दिया है और बिचौलियों की भूमिका खत्म कर दी है।
लेमन टी से लेकर धूपबत्ती तक के यूनिक प्रोडक्ट्स का निर्माण
आज शरद की यूनिट से निकलने वाले उत्पाद केवल खरगोन ही नहीं, बल्कि अन्य जिलों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर भी धूम मचा रहे हैं। उनके (Homemade Organic Products) की लिस्ट में लेमन टी, ट्राइबल टी मसाला, चाट मसाला और हाइड्रेट लाल अमाड़ी जैसे स्वास्थ्यवर्धक उत्पाद शामिल हैं। यहाँ तक कि वे फूलों और औषधियों से सुगंधित धूपबत्ती भी तैयार करते हैं। इन उत्पादों की बढ़ती मांग ने उन्हें एक सफल एग्री-प्रेन्योर (Agri-preneur) बना दिया है, जिससे उनकी कमाई अब पायलट की सैलरी को भी टक्कर देने लगी है।
समाज सेवा से लेकर दृष्टिहीन बच्चों की शिक्षा तक का योगदान
भारत लौटने के बाद राघव ने केवल खेती ही नहीं की, बल्कि सामाजिक सरोकारों से भी गहराई से जुड़े रहे। उन्होंने इंदौर में दृष्टिहीन बच्चों को शिक्षित करने का पुनीत कार्य किया और (Social Service Work) के माध्यम से समाज के वंचित तबकों की मदद की। वर्ष 2013 से 2016 के बीच उत्तराखंड में आए संकट के दौरान उनकी निस्वार्थ सेवाओं को आज भी याद किया जाता है। एक पायलट, एक शिक्षक और अब एक सफल किसान के रूप में उनके बहुआयामी व्यक्तित्व ने लाखों युवाओं को प्रेरित किया है।
युवाओं के लिए प्रेरणा का नया वैश्विक प्रतीक
आज के दौर में जब युवा खेती को घाटे का सौदा समझकर शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं, राघव शरद देवस्थले की कहानी एक मशाल की तरह है। उन्होंने दिखाया कि (Entrepreneurship in Agriculture) के जरिए न केवल पैसा कमाया जा सकता है, बल्कि समाज में मान-सम्मान भी पाया जा सकता है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि अगर आपके पास सही तकनीक और दृढ़ इच्छाशक्ति है, तो गांव की मिट्टी भी आपको वह सब कुछ दे सकती है जिसका सपना आप बड़े शहरों में देखते हैं।
भविष्य की खेती और शरद का विजनरी रोडमैप
राघव अब अपनी यूनिट का विस्तार करने और अधिक से अधिक स्थानीय लोगों को रोजगार देने की योजना बना रहे हैं। वे चाहते हैं कि (Future of Smart Farming) से जुड़कर किसान अपनी उपज का प्रसंस्करण खुद करें। उनकी कहानी न्यूज़ 18 और लोकल 18 जैसे प्रमुख समाचार माध्यमों में आने के बाद, अब दूर-दूर से लोग उनसे परामर्श लेने आ रहे हैं। राघव शरद देवस्थले आज उस गौरव के प्रतीक बन चुके हैं, जिसकी कमी उन्होंने उस उत्तराखंड के बच्चे में देखी थी।

