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Maharashtra farmer success story: कपास की खेती में नवाचार लाने वाले श्रीरंग लाड की प्रेरक गाथा

Maharashtra farmer success story: महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव से निकलकर देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक ‘पद्म पुरस्कार’ तक का सफर तय करना कोई साधारण बात नहीं है। श्रीरंग देवबा लाड ने यह मुकाम अपनी अटूट मेहनत और खेती के प्रति वैज्ञानिक दृष्टिकोण के दम पर हासिल किया है। उनकी कहानी किसी बड़े महानगर के वातानुकूलित दफ्तर से नहीं, बल्कि धूल और मिट्टी से भरे खेतों की उन मेड़ों से शुरू हुई, जहां किसान हर दिन मौसम की बेरुखी और कर्ज के बोझ से लड़ता है। श्रीरंग के सामने भी वही चुनौतियां थीं जो एक आम भारतीय किसान के पास होती हैं—सीमित साधन, बदलता पर्यावरण और खेती की लगातार बढ़ती लागत। लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय कपास की खेती की तस्वीर बदलने का संकल्प लिया।

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कपास की पैदावार में तीन गुना वृद्धि और नई तकनीक

श्रीरंग लाड ने कपास (Maharashtra farmer success story) की खेती में ऐसे क्रांतिकारी प्रयोग किए, जिन्होंने कृषि विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया। उन्होंने अपनी विशेष तकनीकों के जरिए कपास की उपज में लगभग 300 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी सुनिश्चित की। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि उन्होंने न केवल पैदावार बढ़ाई, बल्कि खेती में होने वाले अनावश्यक खर्चों को भी काफी कम कर दिया। उनकी इस पद्धति ने उन किसानों के मन से घाटे का डर निकाल दिया, जो कपास की खेती को जोखिम भरा मानते थे। आज उनके द्वारा अपनाए गए नवाचारों की वजह से कई परिवारों में खुशहाली लौटी है और खेती अब घाटे का सौदा नहीं बल्कि एक मुनाफे वाला व्यवसाय बनती जा रही है।

एक मार्गदर्शक के रूप में किसानों का जीता भरोसा

श्रीरंग लाड की महानता केवल अपनी उपज बढ़ाने तक सीमित नहीं रही। उन्होंने अपने अनुभवों और सफल प्रयोगों को केवल अपने तक रखने के बजाय, निस्वार्थ भाव से समाज में बांटने का फैसला किया। उन्होंने महाराष्ट्र के गांव-गांव जाकर चौपालें लगाईं और साथी किसानों को आधुनिक व कम लागत वाली खेती के गुर सिखाए। उनके सरल स्वभाव और मददगार रवैये ने उन्हें केवल एक सफल किसान नहीं, बल्कि हजारों कृषकों का सच्चा मार्गदर्शक और भरोसेमंद साथी बना दिया। आज पूरे क्षेत्र में उन्हें एक ऐसे ‘एग्रो-गुरु’ के रूप में देखा जाता है, जिन्होंने मिट्टी की भाषा को समझकर उसे सोना उगाने के काबिल बनाया।

पद्म पुरस्कार 2026 और कृषि जगत का गौरव

वर्ष 2026 के पद्म पुरस्कारों की सूची में जब श्रीरंग देवबा लाड का नाम शामिल हुआ, तो यह केवल उनके व्यक्तिगत संघर्ष की जीत नहीं थी, बल्कि पूरे भारतीय किसान समाज का सम्मान था। कृषि क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान और हजारों किसानों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने के प्रयासों को भारत सरकार ने सराहा है। यह पुरस्कार इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि यदि सही सोच और तकनीक का मेल हो, तो आज के दौर में भी खेती के जरिए समाज में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। उनकी यह उपलब्धि विशेष रूप से उन युवाओं के लिए एक मिसाल है जो खेती को पिछड़ा काम मानकर शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं।

भविष्य की खेती और युवाओं के लिए संदेश

श्रीरंग लाड की सफलता की कहानी हमें सिखाती है कि मेहनत के साथ-साथ नवाचार का होना कितना जरूरी है। उन्होंने साबित किया कि अगर हम पारंपरिक तरीकों में विज्ञान और साझेदारी का तड़का लगाएं, तो तरक्की के रास्ते खुद-ब-खुद खुल जाते हैं। उनकी यात्रा इस बात पर जोर देती है कि आत्मनिर्भर भारत का सपना तभी साकार होगा जब देश का अन्नदाता सशक्त और तकनीक से लैस होगा। श्रीरंग देवबा लाड आज देश के उन अनगिनत किसानों के लिए उम्मीद की एक किरण बनकर उभरे हैं, जो अपनी मेहनत से मिट्टी की तकदीर बदलना चाहते हैं।

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