Innovative farming success story: किसान ने कटिहार के गांव में बदली खेती की पहचान, स्ट्रॉबेरी बनी नई मिसाल
Innovative farming success story: बिहार के कटिहार जिले का उदमारेहिका गांव अब केवल पारंपरिक सब्जी उत्पादन के लिए नहीं, बल्कि स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए भी जाना जाने लगा है। सिरनियां पंचायत के इस गांव में खेती की दिशा बदलने वाले किसान हैं लक्ष्मण प्रसाद, जिन्होंने सीमित संसाधनों और शारीरिक चुनौती के बावजूद एक नई राह बनाई। कभी सामान्य सब्जी उत्पादन पर निर्भर रहने वाला यह इलाका आज लाल-लाल स्ट्रॉबेरी की खुशबू से पहचान बना रहा है।

दो पौधों से शुरू हुआ अनोखा प्रयोग
लक्ष्मण प्रसाद ने कुछ वर्ष पहले भागलपुर के सबौर क्षेत्र से सिर्फ दो स्ट्रॉबेरी के पौधे लाकर खेती की शुरुआत की थी। उस समय गांव में शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यह प्रयोग इतना सफल साबित होगा। सब्जी प्रधान क्षेत्र में स्ट्रॉबेरी जैसी फसल को लेकर लोगों में उत्सुकता भी थी और संदेह भी। हालांकि लक्ष्मण ने जोखिम उठाने का फैसला किया और धीरे-धीरे खेती की तकनीक को समझते हुए आगे बढ़ते रहे।
एक एकड़ में फैली सफलता की फसल
आज लक्ष्मण प्रसाद के पास एक एकड़ में फैली स्ट्रॉबेरी की खेती है, जहां पौधे अच्छी तरह विकसित हो रहे हैं। खेती शुरू होने के करीब दो महीने के भीतर पौधों में फल आना शुरू हो जाता है। ताजी स्ट्रॉबेरी कटिहार के स्थानीय बाजारों तक पहुंचती है, जहां इसकी अच्छी मांग बनी रहती है। बाजार से मिलने वाली कीमत पारंपरिक सब्जियों की तुलना में अधिक है, जिससे किसान को बेहतर आमदनी हो रही है।
शारीरिक चुनौती के बावजूद मजबूत इरादे
लक्ष्मण प्रसाद एक हाथ से दिव्यांग हैं, लेकिन उन्होंने कभी इसे अपनी राह में बाधा नहीं बनने दिया। खेती के हर चरण में उन्होंने खुद मेहनत की, नई जानकारी जुटाई और फसल की देखभाल पर विशेष ध्यान दिया। उनका मानना है कि मेहनत और सही योजना के साथ कोई भी खेती लाभकारी बन सकती है। यही सोच उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा देती रही।
बेहतर आमदनी ने बदली सोच
स्ट्रॉबेरी की खेती से मिलने वाली आय ने लक्ष्मण प्रसाद को आर्थिक रूप से मजबूत किया है। वे बताते हैं कि इस फसल से उन्हें पारंपरिक खेती के मुकाबले लगभग दोगुना लाभ मिल रहा है। यही कारण है कि अब वे इसी खेती को आगे बढ़ाने पर ध्यान दे रहे हैं। बाजार की मांग और फसल की गुणवत्ता को देखते हुए वे आने वाले समय में उत्पादन बढ़ाने की भी योजना बना रहे हैं।
अन्य किसानों के लिए बना प्रेरणा स्रोत
लक्ष्मण प्रसाद की सफलता की चर्चा अब आसपास के गांवों तक पहुंच चुकी है। कई किसान उनसे संपर्क कर स्ट्रॉबेरी की खेती से जुड़ी जानकारी ले रहे हैं। कुछ किसानों ने तो इस दिशा में तैयारी भी शुरू कर दी है। उनके प्रयोग ने यह दिखा दिया है कि नई फसलों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है, बशर्ते सही तकनीक और धैर्य हो।
खेती में नवाचार की नई पहचान
उदमारेहिका गांव में स्ट्रॉबेरी की खेती अब केवल एक प्रयोग नहीं रही, बल्कि नवाचार का प्रतीक बन चुकी है। लक्ष्मण प्रसाद की कहानी यह साबित करती है कि सीमित संसाधन और शारीरिक चुनौतियां भी मजबूत इच्छाशक्ति के आगे टिक नहीं पातीं। दो पौधों से शुरू हुआ यह सफर आज पूरे क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा बन गया है और खेती में बदलाव की नई उम्मीद जगा रहा है।

