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FarmerRegistration – कोंच प्रखंड में किसानों के लिए डिजिटल पंजीकरण शिविर शुरू

FarmerRegistration – गया जिले के कोंच प्रखंड में किसानों को सरकारी योजनाओं से सीधे जोड़ने की दिशा में एक अहम पहल शुरू की गई है। पंचायत स्तर पर विशेष शिविर लगाकर किसानों का डिजिटल पंजीकरण किया जा रहा है, ताकि उन्हें भविष्य में योजनाओं का लाभ लेने में किसी तरह की परेशानी न हो। प्रशासन का कहना है कि इस कदम से गांवों में रहने वाले किसानों को कागजी प्रक्रिया और बार-बार दफ्तरों के चक्कर से राहत मिलेगी।

Konch digital farmer registration camp

पंचायतों में पांच स्थानों पर लगाए जाएंगे शिविर

प्रखंड विकास पदाधिकारी विपुल भारद्वाज ने जानकारी दी कि राज्य कृषि विभाग के निर्देश के बाद कोंच प्रखंड की प्रत्येक पंचायत में पांच अलग-अलग गांवों को चिन्हित कर पंजीकरण शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इन शिविरों का उद्देश्य अधिक से अधिक किसानों को एक विशिष्ट डिजिटल किसान आईडी उपलब्ध कराना है। इसके लिए स्थानीय स्तर पर व्यापक तैयारी की गई है, ताकि निर्धारित समय पर अधिकतम किसानों का पंजीकरण हो सके।

अधिकारियों का कहना है कि पंचायत स्तर पर शिविर लगाने से छोटे और सीमांत किसानों को विशेष सुविधा मिलेगी। कई किसान ऐसे हैं जो दूरी या जानकारी के अभाव में पंजीकरण नहीं करा पाते थे। अब उनके गांव के पास ही यह सुविधा उपलब्ध होगी।

सरकारी योजनाओं के लिए जरूरी होगा पंजीकरण

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह डिजिटल किसान आईडी आगे चलकर विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए अनिवार्य होगी। इसमें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फसल बीमा योजना और बीज-खाद पर मिलने वाले अनुदान जैसी योजनाएं शामिल हैं।

डिजिटल पहचान बनने से किसानों का डाटा एकीकृत रूप में उपलब्ध रहेगा, जिससे पात्रता की जांच और लाभ हस्तांतरण की प्रक्रिया सरल हो सकेगी। अधिकारियों का मानना है कि इससे पारदर्शिता भी बढ़ेगी और लाभार्थियों को समय पर सहायता मिल पाएगी।

स्थानीय कर्मियों की जिम्मेदारी तय

शिविरों को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए पंचायत स्तर के विभिन्न कर्मियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इनमें पंचायत सचिव, पीआरएस, आवास सहायक, कार्यपालक सहायक, डाटा एंट्री ऑपरेटर और सर्वे अमीन शामिल हैं। सभी कर्मियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि पंजीकरण प्रक्रिया में किसी प्रकार की लापरवाही न हो।

शिविर स्थल पर किसानों का ई-केवाईसी किया जा रहा है। जिन किसानों का पहले से पंजीकरण नहीं हुआ है, उनका नया निबंधन किया जा रहा है। साथ ही भूमि से संबंधित विवरण का मिलान भी सुनिश्चित किया जा रहा है, ताकि आगे चलकर किसी प्रकार की तकनीकी अड़चन न आए।

किसानों को मिलेगी दफ्तरों के चक्कर से राहत

ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर देखा गया है कि योजनाओं की जानकारी या दस्तावेजों की कमी के कारण किसान लाभ से वंचित रह जाते हैं। कई बार उन्हें प्रखंड या जिला मुख्यालय तक जाना पड़ता है, जिससे समय और खर्च दोनों बढ़ते हैं।

इस पहल के तहत प्रशासन का प्रयास है कि अधिकतम कार्य गांव स्तर पर ही पूरा कर लिया जाए। शिविरों में उपस्थित कर्मी मौके पर ही जरूरी मार्गदर्शन भी दे रहे हैं। इससे किसानों को न सिर्फ पंजीकरण में सहूलियत मिलेगी, बल्कि उन्हें योजनाओं की जानकारी भी सीधे मिल सकेगी।

डिजिटल व्यवस्था से बढ़ेगी पारदर्शिता

प्रखंड प्रशासन का मानना है कि डिजिटल प्रणाली लागू होने से कृषि योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता आएगी। एकीकृत किसान डाटाबेस तैयार होने से यह स्पष्ट रहेगा कि किसे किस योजना का लाभ मिला है। इससे दोहराव या गड़बड़ी की संभावना कम होगी।

कोंच प्रखंड में शुरू की गई यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आने वाले समय में इसका सीधा असर किसानों की आय और योजनाओं की पहुंच पर देखने को मिल सकता है।

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