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Bihar Makhana Subsidy Scheme 2026: बिहार के किसानों के लिए मखाना बना तकदीर बदलने वाला ‘सुपर फूड’, अब सरकार ने की बड़ी मदद

Bihar Makhana Subsidy Scheme 2026:  बिहार का मखाना आज केवल एक पारंपरिक खाद्य पदार्थ नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान एक ‘सुपर फूड’ के रूप में बना चुका है। स्वास्थ्य के प्रति जागरूक दुनिया अब मखाने की पौष्टिकता की कायल हो रही है, जिससे इसकी मांग सातवें आसमान पर पहुंच गई है। इसी बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकार ने (Makhana Farming Promotion) के लिए कमर कस ली है। कृषि विभाग की नई पहल का उद्देश्य बिहार के किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और मखाना उत्पादन को आधुनिक तकनीक से जोड़ना है, ताकि इसकी मिठास दुनिया के हर कोने तक पहुंचे।

Bihar makhana subsidy scheme 2026

सब्सिडी के लिए आवेदन की अंतिम तिथि और डिजिटल प्रक्रिया

सरकार ने इस योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदन की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और डिजिटल बना दिया है। जो किसान इस योजना का हिस्सा बनना चाहते हैं, उन्हें 15 जनवरी तक अपनी दावेदारी पेश करनी होगी। आवेदन के लिए (Bihar Krishi App Registration) या उद्यान निदेशालय की आधिकारिक वेबसाइट का सहारा लिया जा सकता है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस बार उन नए किसानों को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी जो पहली बार मखाना की खेती के क्षेत्र में कदम रख रहे हैं, जिससे इस पारंपरिक खेती का विस्तार नए क्षेत्रों में हो सके।

प्रति हेक्टेयर लागत और सरकारी सहायता का गणित

मखाना की खेती को एक लाभदायक व्यवसाय बनाने के लिए सरकार ने इसकी इकाई लागत का सटीक निर्धारण किया है। विभाग के अनुसार, प्रति हेक्टेयर खेती की कुल लागत लगभग 0.97 लाख रुपये तय की गई है, जिसमें बीज से लेकर हार्वेस्टिंग तक का खर्च शामिल है। इस भारी निवेश में किसानों की मदद के लिए (Makhana Cultivation Subsidy Amount) के तहत पहले साल में 36,375 रुपये प्रति हेक्टेयर की वित्तीय सहायता दी जाएगी। यह राशि दो चरणों में जारी की जाएगी, जिससे किसानों को खेती के दौरान नकदी की कमी महसूस न हो और वे गुणवत्तापूर्ण उत्पादन पर ध्यान दे सकें।

बीज वितरण और उन्नत किस्मों पर विशेष ध्यान

मखाने की पैदावार बढ़ाने के लिए सरकार उन्नत बीजों के इस्तेमाल पर जोर दे रही है। ‘स्वर्ण वैदेही’ और ‘सबौर मखाना-1’ जैसी बेहतरीन किस्मों के बीजों का उत्पादन विशेष संस्थानों के माध्यम से कराया जा रहा है। (Improved Makhana Seeds Subsidy) योजना के अंतर्गत किसानों को बीज पर अधिकतम 225 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से अनुदान दिया जाएगा। बीज की राशि सीधे आपूर्तिकर्ता को दी जाएगी, जिससे किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज बिना किसी अतिरिक्त आर्थिक बोझ के उपलब्ध हो सकें। यदि बीज की कीमत निर्धारित अनुदान से अधिक होती है, तो शेष राशि किसान को देनी होगी।

डीबीटी पोर्टल पर पंजीकरण है अनिवार्य शर्त

इस योजना का लाभ केवल वही किसान उठा सकते हैं जो बिहार सरकार के विभागीय पोर्टल डीबीटी (DBT) पर पहले से पंजीकृत हैं। सरकार ने भूमि की सीमा को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। एक (Registered Farmer Benefits) के रूप में कोई भी किसान न्यूनतम 0.1 हेक्टेयर और अधिकतम 2 हेक्टेयर तक की भूमि के लिए सब्सिडी प्राप्त कर सकता है। यह सीमा इसलिए तय की गई है ताकि छोटे और सीमांत किसानों को भी इस योजना का भरपूर लाभ मिल सके और मखाना उत्पादन का विकेंद्रीकरण हो सके।

बिहार के इन 16 जिलों को मिला योजना का कवर

मखाना उत्पादन की अनुकूल भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए राज्य के 16 प्रमुख जिलों का चयन इस योजना के लिए किया गया है। इनमें कटिहार, पूर्णिया, दरभंगा, मधुबनी, किशनगंज और सुपौल जैसे (Makhana Growing Districts Bihar) शामिल हैं। इसके अलावा अररिया, मधेपुरा, सहरसा, खगड़िया, समस्तीपुर, भागलपुर, सीतामढ़ी, पूर्वी चम्पारण, पश्चिम चम्पारण और मुजफ्फरपुर के किसान भी इस सरकारी अनुदान के हकदार होंगे। इन जिलों में मखाने की खेती का विस्तार न केवल स्थानीय रोजगार पैदा करेगा, बल्कि बिहार को मखाना प्रोसेसिंग का हब भी बनाएगा।

आय में उल्लेखनीय वृद्धि और भविष्य की संभावनाएं

मखाना क्षेत्र विस्तार योजना केवल सब्सिडी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह किसानों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने का एक जरिया है। आधुनिक उपकरणों और तकनीकी सहयोग मिलने से (Farmer Income Growth Bihar) की संभावना अब हकीकत में बदलती दिख रही है। मखाना अब केवल तालाबों तक सीमित न रहकर खेत प्रणाली (Field System) के जरिए भी उगाया जा रहा है, जिससे इसकी खेती आसान और अधिक उत्पादक हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में बिहार का यह सफेद सोना किसानों की तिजोरी भरने में सबसे बड़ी भूमिका निभाएगा।

सुपर फूड के रूप में मखाने का बढ़ता निर्यात मूल्य

बिहार सरकार मखाने की ब्रांडिंग पर भी विशेष काम कर रही है ताकि किसानों को उनके उत्पाद का वैश्विक मूल्य मिल सके। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में (Global Superfood Demand) बढ़ने से मखाने के निर्यात की अपार संभावनाएं पैदा हुई हैं। जब किसान उन्नत बीज और सरकारी तकनीकी सहायता से उत्पादन करेंगे, तो उत्पाद की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरी उतरेगी। इससे न केवल बिहार के मखाने की साख बढ़ेगी, बल्कि निर्यात से मिलने वाला विदेशी पैसा सीधे किसानों के खातों में पहुंचेगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई मजबूती मिलेगी।

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