Onion Farming: छपरा में उन्नत प्याज बीज से बदलती खेती की तस्वीर
Onion Farming: बिहार के छपरा जिले में प्याज की खेती धीरे-धीरे किसानों के लिए आय का मजबूत जरिया बनती जा रही है। यहां की मिट्टी और जलवायु प्याज उत्पादन के लिए अनुकूल मानी जाती है, इसी वजह से बड़ी संख्या में किसान इस फसल की ओर आकर्षित हो रहे हैं। हालांकि, प्याज की खेती में सफलता का सबसे बड़ा आधार अच्छा और भरोसेमंद बीज होता है, जो आज भी कई किसानों के लिए एक गंभीर समस्या बना हुआ है।

बीज की समस्या और किसानों की परेशानी
छपरा जिले के किसान जब प्याज की खेती का मन बनाते हैं, तो सबसे पहले उन्हें बीज की चिंता सताने लगती है। स्थानीय स्तर पर भरोसेमंद बीज आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाता, जिसके कारण किसानों को दूसरे जिलों और बाजारों का रुख करना पड़ता है। कई किसान हाजीपुर, दिघवारा, घोड़हट जैसे इलाकों में बीज लेने जाते हैं। इस प्रक्रिया में समय, पैसा और मेहनत तीनों लगते हैं। इसके बावजूद कई बार किसानों को नकली या कमजोर गुणवत्ता वाला बीज मिल जाता है। ऐसे बीज खेत में बोने के बाद उम्मीद के अनुसार अंकुरण नहीं करते और फसल कमजोर रह जाती है। इसका सीधा असर पैदावार और आमदनी पर पड़ता है।
लागत बढ़ने से घटता मनोबल
जब बीज सही नहीं होता तो किसान को दोहरी मार झेलनी पड़ती है। एक तरफ बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी पर खर्च बढ़ जाता है, वहीं दूसरी तरफ उत्पादन कम हो जाता है। इससे प्याज की खेती घाटे का सौदा बन जाती है। लगातार नुकसान उठाने के कारण कई किसानों का मनोबल टूटने लगता है और वे दोबारा प्याज लगाने से कतराने लगते हैं। यही वजह है कि भरोसेमंद बीज की उपलब्धता को खेती की सबसे बड़ी जरूरत माना जा रहा है।
स्थानीय स्तर पर बीज तैयार करने की पहल
इन सभी चुनौतियों के बीच छपरा जिले के कुछ प्रगतिशील किसानों ने एक नई राह दिखाई है। उन्होंने बाजार पर निर्भर रहने के बजाय खुद उन्नत किस्म के प्याज के बीज तैयार करना शुरू कर दिया है। इस पहल से न सिर्फ उनकी अपनी खेती मजबूत हुई है, बल्कि आसपास के अन्य किसानों को भी इसका फायदा मिल रहा है। स्थानीय स्तर पर बीज उपलब्ध होने से किसानों का खर्च कम हो रहा है और ठगी का खतरा भी लगभग खत्म हो गया है।
दूर-दूर से बीज लेने आते हैं किसान
छपरा में तैयार किए जा रहे उन्नत प्याज बीज की चर्चा अब आसपास के इलाकों में भी होने लगी है। अच्छी पैदावार और बेहतर गुणवत्ता के कारण किसान इन बीजों पर भरोसा करने लगे हैं। यही वजह है कि जिले के अलग-अलग प्रखंडों से किसान यहां बीज लेने पहुंचते हैं। उन्हें यह भरोसा होता है कि स्थानीय किसान द्वारा तैयार किया गया बीज क्षेत्र की मिट्टी और मौसम के अनुसार ही विकसित किया गया है, जिससे फसल अच्छी होती है।
उमेश प्रसाद की नर्सरी बनी किसानों का सहारा
छपरा जिले के मांझी प्रखंड के शीतलपुर गांव निवासी किसान उमेश प्रसाद इस बदलाव की एक बड़ी मिसाल हैं। उन्होंने अपने अनुभव और मेहनत के बल पर प्याज की उन्नत किस्मों के बीज तैयार करने की शुरुआत की। उनके पास गौरांग और नासिक किस्म के बीज उपलब्ध हैं, जिनकी मांग पूरे सारण क्षेत्र में लगातार बढ़ रही है। उमेश अपने खेत में भी इन्हीं किस्मों की खेती करते हैं और हर साल अच्छी पैदावार हासिल करते हैं। यही कारण है कि अन्य किसान भी उनके बीज पर पूरा भरोसा करते हैं।
बुवाई के लिए समय से तैयार बीज
उमेश प्रसाद द्वारा तैयार किए गए प्याज के बीज पूरी तरह जांचे और परखे होते हैं। प्याज लगाने वाले किसान पहले से ही बीज की बुकिंग करा रहे हैं, ताकि बुवाई के समय किसी तरह की परेशानी न हो। मौसम अनुकूल होते ही खेतों में बुवाई शुरू हो जाती है, जिससे फसल समय पर तैयार होती है और बाजार में अच्छे दाम मिलते हैं।
उन्नत किस्मों की खासियत
गौरांग और नासिक किस्म के प्याज की सबसे बड़ी खासियत उनका आकार, वजन और टिकाऊपन है। इन किस्मों का प्याज औसतन 150 से 200 ग्राम तक का होता है। खेत से निकालने के बाद भी यह जल्दी खराब नहीं होता, जिससे भंडारण और बिक्री दोनों में सुविधा रहती है। स्वाद के मामले में भी यह प्याज ग्राहकों को पसंद आता है। बुवाई के करीब 120 दिनों में फसल तैयार हो जाती है, जिससे किसान कम समय में अच्छी कमाई कर सकते हैं।
स्थानीय नर्सरी से मिल रहा भरोसा
शीतलपुर बाजार के पास स्थित उमेश प्रसाद की नर्सरी आज किसानों के लिए एक भरोसेमंद केंद्र बन चुकी है। यहां से किसान सीधे उन्नत किस्म का प्याज बीज प्राप्त कर सकते हैं। जनवरी के अंत तक बीज पूरी तरह तैयार हो जाता है और मौसम साफ होते ही खेतों में बुवाई शुरू हो जाती है। इस तरह स्थानीय प्रयासों से छपरा जिले में प्याज की खेती लगातार मजबूत होती जा रही है और किसानों की आमदनी बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही है।

