AGRICULTURE

Garlic Farming – एक बीघा जमीन से किसान ने कमाए 1.30 लाख रुपये

Garlic Farming – शिवपुरी जिले के कोलारस क्षेत्र में खेती की तस्वीर धीरे-धीरे बदल रही है। पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहने वाले किसान अब नगदी और उन्नत खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। इसी बदलाव की मिसाल मोहरा गांव के एक प्रगतिशील किसान ने पेश की है, जिन्होंने केवल एक बीघा जमीन में लहसुन की खेती कर करीब 1 लाख 30 हजार रुपये की आमदनी हासिल की। यह सफलता सिर्फ कमाई की कहानी नहीं है, बल्कि सोच और तरीके में आए बदलाव का परिणाम है।

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खेती में बदलाव की शुरुआत

किसान राजन सिंह बताते हैं कि पहले वे गेहूं, चना और सरसों जैसी पारंपरिक फसलें उगाते थे। इन फसलों से उत्पादन तो होता था, लेकिन बढ़ती लागत के बीच मुनाफा सीमित रह जाता था। कई बार तो खर्च निकालना भी चुनौती बन जाता था। ऐसे में उन्होंने नई संभावनाओं की तलाश शुरू की। बाजार की मांग और कृषि विशेषज्ञों की सलाह को ध्यान में रखते हुए उन्होंने लहसुन की खेती को अपनाने का फैसला किया। शुरुआत में यह एक प्रयोग था, लेकिन परिणाम उम्मीद से कहीं बेहतर निकले।

कृषि विभाग का मार्गदर्शन बना सहारा

राजन सिंह का कहना है कि इस सफलता के पीछे कृषि विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका रही। विभाग के अधिकारियों ने उन्हें उन्नत बीज उपलब्ध कराए और सही मात्रा में खाद देने की जानकारी दी। साथ ही सिंचाई प्रबंधन और फसल की देखभाल के बारे में भी विस्तार से समझाया। समय-समय पर खेत का निरीक्षण किया गया, जिससे रोग और कीटों से बचाव संभव हो सका। वैज्ञानिक तरीके से की गई खेती ने उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों को बेहतर बनाया।

लागत और मुनाफे का संतुलन

एक बीघा जमीन में लहसुन की खेती करने के लिए शुरुआती लागत जरूर लगी, लेकिन सही योजना और देखभाल से उत्पादन अच्छा हुआ। बाजार में लहसुन की मांग बनी रहने और उचित दाम मिलने से कुल आय लगभग 1.30 लाख रुपये तक पहुंच गई। राजन सिंह बताते हैं कि पारंपरिक फसलों की तुलना में यह आय कई गुना अधिक है। उनका मानना है कि अगर किसान बाजार की जरूरत को समझकर फसल का चयन करें, तो कम जमीन में भी बेहतर आमदनी संभव है।

बाजार में मांग ने बढ़ाया उत्साह

लहसुन एक ऐसी फसल है जिसकी मांग सालभर बनी रहती है। घरेलू उपयोग से लेकर मसाला उद्योग तक इसकी खपत लगातार होती है। यही कारण है कि इस बार बाजार में उन्हें अच्छा भाव मिला। राजन सिंह का कहना है कि फसल की गुणवत्ता अच्छी होने से व्यापारियों ने सीधे खेत से ही खरीदारी की। इससे परिवहन और भंडारण की अतिरिक्त परेशानी भी नहीं उठानी पड़ी।

आने वाले समय की योजना

सफलता से उत्साहित होकर अब वे लहसुन की खेती का रकबा बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं। उनका मानना है कि अगर क्षेत्रफल बढ़ाया जाए तो आय में और वृद्धि हो सकती है। वे अन्य किसानों को भी सलाह देते हैं कि नई तकनीक और विभागीय योजनाओं का लाभ उठाएं। सही जानकारी और समय पर सलाह मिल जाए तो खेती घाटे का सौदा नहीं रहती।

अन्य किसानों के लिए प्रेरणा

मोहरा गांव की यह कहानी आसपास के किसानों के लिए प्रेरणादायक बन गई है। कई किसान अब लहसुन और अन्य नगदी फसलों की ओर रुचि दिखा रहे हैं। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि बदलते समय में खेती के तौर-तरीकों में सुधार जरूरी है। सीमित संसाधनों में बेहतर उत्पादन पाने के लिए वैज्ञानिक पद्धति और बाजार की समझ दोनों अहम हैं।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रहा बल

इस तरह की पहल से न केवल किसान की आय बढ़ती है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है। जब किसान आर्थिक रूप से सशक्त होता है, तो उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे क्षेत्र पर पड़ता है। शिवपुरी जिले में हो रहे ये छोटे-छोटे बदलाव आने वाले समय में बड़े परिणाम ला सकते हैं।

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