AGRICULTURE

Floriculture – फरवरी में रजनीगंधा खेती से बढ़ सकती है आमदनी

Floriculture – समस्तीपुर जिले के किसानों के लिए फरवरी का महीना नई संभावनाएं लेकर आया है। फूलों की खेती में रुचि रखने वाले किसानों को इस समय रजनीगंधा की बुवाई शुरू करने की सलाह दी जा रही है। पूसा स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय की पुष्प विशेषज्ञ डॉ. पार्वती के अनुसार फरवरी और मार्च के बीच कंद रोपण करने से पौधों की बढ़वार अच्छी होती है और फूलों की पैदावार अधिक मिलती है। मौसम की अनुकूलता इस फसल के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है, जिससे शुरुआती विकास मजबूत होता है और उत्पादन क्षमता बेहतर रहती है।

February tuberose farming income boost

रोपण से पहले जरूरी सावधानियां

रजनीगंधा की सफल खेती के लिए शुरुआत से ही सावधानी बरतना आवश्यक है। विशेषज्ञों का कहना है कि कंदों को खेत में लगाने से पहले फफूंदनाशक दवा से उपचारित करना चाहिए, ताकि शुरुआती चरण में रोगों से बचाव हो सके। सही दूरी पर रोपाई करने से पौधों को पर्याप्त जगह मिलती है और पोषण संतुलित रहता है। इसके साथ ही जैविक खाद या संतुलित उर्वरक का प्रयोग तथा नियमित सिंचाई फसल को स्वस्थ बनाए रखने में मददगार होती है। अच्छी जल निकासी वाली भूमि इस खेती के लिए उपयुक्त मानी जाती है।

छोटे और सीमांत किसानों के लिए अनुकूल फसल

रजनीगंधा की खेती की खास बात यह है कि इसे बड़े खेत की आवश्यकता नहीं होती। सीमित जमीन वाले किसान भी कम लागत में इसकी शुरुआत कर सकते हैं। देखभाल अपेक्षाकृत सरल होने के कारण यह फसल जोखिम कम और लाभ की संभावना अधिक देती है। यदि समय पर निराई-गुड़ाई और पोषण प्रबंधन किया जाए तो प्रति एकड़ अच्छी पैदावार संभव है। यही कारण है कि कई किसान पारंपरिक फसलों के साथ-साथ फूलों की खेती को अतिरिक्त आय के विकल्प के रूप में अपना रहे हैं।

उन्नत किस्मों से बेहतर दाम

विशेषज्ञों के मुताबिक रजनीगंधा की उन्नत किस्मों का चयन करना बेहद जरूरी है। आर्का प्रज्वल, कोलकाता सिंगल और कोलकाता डबल जैसी किस्में उत्पादन और बाजार मांग दोनों के लिहाज से बेहतर मानी जाती हैं। सिंगल प्रकार के फूलों का उपयोग माला और सजावटी लड़ी बनाने में किया जाता है। इसके अलावा इनसे सुगंधित उत्पाद भी तैयार होते हैं, जिनकी मांग निरंतर बनी रहती है। वहीं डबल किस्म के फूल आकार में घने और आकर्षक होते हैं, जिनका इस्तेमाल शादी-ब्याह, कार्यक्रमों और सजावट में बड़े पैमाने पर होता है।

आर्का प्रज्वल विशेष रूप से लंबी डंडी और अधिक फूल देने के लिए जानी जाती है। थोक बाजार में इसकी मांग अधिक रहती है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने की संभावना रहती है। यदि किसान स्थानीय मंडियों के साथ-साथ बड़े शहरों तक आपूर्ति की व्यवस्था करें, तो आमदनी और बढ़ सकती है।

फूल के साथ कंद से भी आय

रजनीगंधा की खेती का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इससे दो तरह से कमाई की जा सकती है। नियमित रूप से फूलों की बिक्री से आय होती ही है, साथ ही तैयार हुए कंदों को भी बीज सामग्री के रूप में बेचा जा सकता है। रोपाई के लगभग तीन वर्षों के भीतर कंद अच्छी गुणवत्ता के हो जाते हैं। अन्य किसान इन्हें अगली फसल के लिए खरीदते हैं, जिससे अतिरिक्त आय का स्रोत बनता है। इस तरह एक ही फसल से दोहरा लाभ संभव है।

कम रोग, अधिक लाभ की संभावना

विशेषज्ञों का मानना है कि रजनीगंधा में रोग अपेक्षाकृत कम लगते हैं, जिससे दवाइयों पर खर्च सीमित रहता है। सही समय पर देखभाल और पोषण प्रबंधन से उत्पादन स्थिर रहता है। फरवरी में शुरू की गई यह खेती न केवल खेतों को खुशबू से भर देती है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने का व्यावहारिक विकल्प भी बन सकती है। वैज्ञानिक सलाह का पालन कर किसान बेहतर परिणाम हासिल कर सकते हैं और फूलों की बढ़ती मांग का लाभ उठा सकते हैं।

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