Air Potato: हवा में फलने वाला हवाई आलू बना किसानों की नई उम्मीद
Air Potato: जिले के रामनगर प्रखंड के हरपुर गांव में इन दिनों खेती की दुनिया में एक अनोखा प्रयोग चर्चा का विषय बना हुआ है। यहां के प्रगतिशील किसान विजय गिरी ने अपने बागीचे में ऐसी फसल उगाई है, जो देखने में ही लोगों को हैरान कर रही है। यह आलू मिट्टी में नहीं बल्कि हवा में उगता है, इसलिए इसे हवाई आलू कहा जाता है। इसकी खेती की विधि, बनावट और पोषण गुण इसे सामान्य आलू से बिल्कुल अलग बनाते हैं। यही वजह है कि यह फसल न केवल किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही है, बल्कि सेहत के लिहाज से भी इसे वरदान माना जा रहा है।

हवाई आलू क्या है और क्यों है खास
हवाई आलू एक दुर्लभ किस्म की फसल है, जिसे पारंपरिक तरीके से खेत की मिट्टी में नहीं उगाया जाता। यह बेल के रूप में बढ़ता है और मचान या पेड़ों के सहारे ऊपर की ओर चढ़ता है। इसके फल जमीन के नीचे नहीं बल्कि हवा में लटकते हुए विकसित होते हैं। आकार में यह आलू सामान्य आलू से अलग होता है और देखने में किसी फल जैसा प्रतीत होता है। यही अनोखापन इसे लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बनाता है।
खेती का तरीका पूरी तरह अलग
हवाई आलू की खेती के लिए खेत की गहरी जुताई की आवश्यकता नहीं होती। इसे मचान प्रणाली पर उगाया जाता है, ठीक उसी तरह जैसे लौकी, कद्दू या करेला उगाए जाते हैं। किसान को बेल को सहारा देने के लिए बांस या लकड़ी से मचान बनाना होता है। जैसे-जैसे बेल बढ़ती है, वैसे-वैसे उस पर हवा में आलू विकसित होने लगते हैं। इस खेती में पानी की जरूरत भी सीमित होती है, जिससे यह कम लागत वाली खेती मानी जा रही है।
स्वास्थ्य के लिए क्यों है लाभकारी
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार हवाई आलू में पोषण तत्वों की भरपूर मात्रा पाई जाती है। इसमें स्टार्च की मात्रा कम होती है, जबकि विटामिन, खनिज तत्व और एंटीऑक्सीडेंट्स अधिक पाए जाते हैं। यही कारण है कि यह पाचन के लिए हल्का माना जाता है। मधुमेह से पीड़ित लोगों के लिए यह एक सुरक्षित विकल्प माना जा रहा है, क्योंकि इसका सेवन करने से रक्त शर्करा तेजी से नहीं बढ़ती। इसके अलावा यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी सहायक माना जाता है।
दुर्लभ फसलों के प्रति किसान की रुचि
हरपुर गांव निवासी विजय गिरी कोई नए किसान नहीं हैं। वे पिछले कई वर्षों से अनोखी और कम प्रचलित फसलों की खेती कर रहे हैं। उन्होंने चम्पारण की मिट्टी में इलायची, माल्टा, खस, मैजिक चावल, काली हल्दी और कई रंगीन किस्मों की फसलें उगाकर अपनी अलग पहचान बनाई है। हवाई आलू की खेती भी इसी श्रृंखला का एक हिस्सा है। उनका मानना है कि अगर किसान पारंपरिक खेती से हटकर कुछ नया अपनाएं तो आमदनी में बड़ा बदलाव आ सकता है।
बाजार में मिल रही बेहतर कीमत
हवाई आलू की मांग धीरे-धीरे बाजार में बढ़ रही है। विजय गिरी बताते हैं कि उन्होंने इस फसल के बीज छत्तीसगढ़ से मंगवाए थे। हालांकि इसका आकार और उगने का तरीका अलग है, लेकिन स्वाद लगभग सामान्य आलू जैसा ही होता है। पोषण गुण अधिक होने और दुर्लभ होने के कारण बाजार में इसकी कीमत साधारण आलू से लगभग दोगुनी मिल रही है। यही वजह है कि कम क्षेत्र में खेती करके भी किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।
किसानों के लिए नई संभावनाएं
हवाई आलू की खेती उन किसानों के लिए खास अवसर लेकर आई है, जो सीमित जमीन और संसाधनों में अधिक लाभ कमाना चाहते हैं। मचान प्रणाली के कारण यह फसल कम जगह में भी उगाई जा सकती है। साथ ही इसकी देखभाल अपेक्षाकृत आसान है। अगर किसानों को इसके बारे में सही जानकारी और प्रशिक्षण मिले, तो यह फसल भविष्य में वैकल्पिक खेती का मजबूत आधार बन सकती है।
भविष्य में बढ़ सकती है लोकप्रियता
विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे लोग स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हो रहे हैं, वैसे-वैसे हवाई आलू जैसी पोषक फसलों की मांग बढ़ेगी। आने वाले समय में यह फसल न केवल स्थानीय बाजार बल्कि बड़े शहरों तक अपनी पहचान बना सकती है। यदि सरकारी स्तर पर भी इसके प्रचार और प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाए, तो यह किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती है।

