Agarikalchar tips: गड्ढे में उगने वाला हरा चारा जो पोल्ट्री फार्मिंग की लागत घटाकर मुनाफा बढ़ा देता है
Agarikalchar tips: अगर आप पोल्ट्री फार्मिंग से जुड़े हैं और लगातार बढ़ती दाने की कीमतों से परेशान रहते हैं, तो अब आपके लिए एक आसान और देसी समाधान मौजूद है। मुर्गियों के अच्छे स्वास्थ्य, तेज़ वृद्धि और बेहतर अंडा उत्पादन के लिए हरे चारे की भूमिका बहुत अहम होती है। इसी जरूरत को पूरा करता है अजोला, जो पानी में उगने वाला एक ऐसा पौधा है जिसे बहुत कम खर्च और मेहनत में तैयार किया जा सकता है। सही तरीके से इस्तेमाल करने पर यह चारा मुर्गियों के दाने पर होने वाले खर्च को काफी हद तक कम कर सकता है और फार्म की कुल आमदनी बढ़ा सकता है।

अजोला क्या है और क्यों खास है
अजोला एक जलीय पौधा है जो तालाब, टंकी या छोटे गड्ढे में आसानी से उगाया जा सकता है। यह देखने में हरे रंग का होता है और पानी की सतह पर फैलकर तेजी से बढ़ता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका पोषण स्तर है। इसमें प्रोटीन, आवश्यक अमीनो एसिड, विटामिन और खनिज तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इसी कारण इसे पशु आहार की दुनिया में एक प्रभावी विकल्प माना जाता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार अजोला में मौजूद पोषक तत्व मुर्गियों के शरीर में जल्दी अवशोषित हो जाते हैं, जिससे उनका विकास तेज़ होता है।
पोषण तत्वों का प्राकृतिक भंडार
अजोला में प्रोटीन की मात्रा कई अन्य हरे चारे की तुलना में कहीं अधिक होती है। इसके साथ ही इसमें कैल्शियम, फॉस्फोरस, पोटैशियम, मैग्नीशियम और तांबे जैसे खनिज तत्व भी मौजूद रहते हैं। ये सभी तत्व मुर्गियों की हड्डियों को मजबूत बनाने, अंडे के छिलके की गुणवत्ता सुधारने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं। भारत में पाई जाने वाली अजोला की प्रजातियां स्थानीय जलवायु के अनुकूल होती हैं, इसलिए इसे उगाने में ज्यादा जोखिम नहीं होता।
मांस और अंडा उत्पादन में सुधार
कृषि विज्ञान से जुड़े विशेषज्ञ बताते हैं कि मुर्गियों को नियमित रूप से थोड़ी मात्रा में अजोला खिलाने से उनके वजन में तेजी से बढ़ोतरी देखी जाती है। साथ ही अंडा देने वाली मुर्गियों की उत्पादक क्षमता भी बेहतर होती है। माधोपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में कार्यरत डॉ. जगपाल के अनुसार अजोला के नियमित सेवन से मांस और अंडा उत्पादन में दस से पंद्रह प्रतिशत तक की बढ़ोतरी संभव है। इससे पोल्ट्री फार्मर को बाजार में बेहतर दाम मिलते हैं और कुल मुनाफा बढ़ता है।
दाने के खर्च में कटौती
पोल्ट्री फार्मिंग में सबसे बड़ा खर्च मुर्गियों के दाने पर आता है। अजोला को अगर आहार में शामिल कर लिया जाए, तो तैयार दाने की मात्रा को कुछ हद तक कम किया जा सकता है। इससे न सिर्फ लागत घटती है, बल्कि मुर्गियों को ताजा और पौष्टिक भोजन भी मिलता है। खास बात यह है कि अजोला को घर पर ही उगाया जा सकता है, जिससे बाहर से चारा खरीदने की जरूरत कम हो जाती है।
भेड़ और बकरियों के लिए भी उपयोगी
अजोला का फायदा केवल मुर्गियों तक सीमित नहीं है। भेड़ और बकरियों को भी यह चारा दिया जा सकता है। रोजाना सीमित मात्रा में अजोला खिलाने से उनके शारीरिक विकास में सुधार आता है और दुग्ध उत्पादन बढ़ने की संभावना रहती है। ग्रामीण इलाकों में जहां हरे चारे की कमी रहती है, वहां अजोला पशुपालकों के लिए एक भरोसेमंद विकल्प बन सकता है।
अजोला उगाने का आसान तरीका
अजोला उगाने के लिए किसी बड़े खेत या महंगे उपकरण की जरूरत नहीं होती। एक छोटा सा गड्ढा, प्लास्टिक की टंकी या सीमेंट का हौद काफी होता है। इसमें पानी भरकर थोड़ी मात्रा में अजोला कल्चर डाल दिया जाता है। कुछ ही दिनों में यह पौधा फैलने लगता है और रोजाना कटाई के लिए तैयार हो जाता है। सही देखभाल करने पर सालभर अजोला की उपलब्धता बनी रहती है।
रोजाना खिलाने का सही तरीका
मुर्गियों को अजोला ताजा अवस्था में या सुखाकर दोनों तरह से खिलाया जा सकता है। छोटे फार्म में इसे सीधे दाने के साथ मिलाकर दिया जा सकता है। ध्यान रखें कि मात्रा सीमित हो और धीरे-धीरे इसे आहार में शामिल किया जाए। नियमित सेवन से मुर्गियों का स्वास्थ्य बेहतर रहता है और उत्पादन में स्थिरता आती है।
टिकाऊ और लाभकारी विकल्प
आज के समय में जब खेती और पशुपालन में लागत लगातार बढ़ रही है, अजोला जैसे प्राकृतिक चारे टिकाऊ समाधान प्रदान करते हैं। यह पर्यावरण के अनुकूल है, सस्ता है और लंबे समय तक लाभ देता है। पोल्ट्री फार्मर अगर इसे अपनी रोजमर्रा की फार्मिंग में शामिल करें, तो कम खर्च में बेहतर उत्पादन हासिल कर सकते हैं।

