Vegetable Cultivation Success Story- बस्तर के किसान की गोभी से हुई लाखों की आमदनी
Vegetable Cultivation Success Story- बस्तर जिले के एक किसान ने परंपरागत खेती से आगे बढ़कर फूलगोभी की पैदावार में ऐसा मॉडल तैयार किया है, जो आसपास के किसानों के लिए प्रेरणा बन रहा है। चैतन कश्यप पिछले करीब पांच वर्षों से लगातार गोभी की खेती कर रहे हैं और इससे अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह कम अवधि की फसल है, जो लगभग दो महीने में तैयार हो जाती है और बाजार में इसकी स्थिर मांग बनी रहती है। सही प्रबंधन के साथ यह खेती सीमित लागत में बेहतर रिटर्न दे सकती है।

लगातार पांच साल से कर रहे हैं उत्पादन
चैतन कश्यप ने बताया कि उन्होंने लगभग एक एकड़ जमीन पर फूलगोभी लगाई है। शुरुआती वर्षों में उन्होंने छोटे पैमाने से शुरुआत की, लेकिन सकारात्मक परिणाम मिलने के बाद क्षेत्र बढ़ाया। उनका अनुभव है कि छत्तीसगढ़ में गोभी की मांग साल के अधिकांश समय बनी रहती है। सामान्यतः बाजार में इसका दाम 50 से 80 रुपये प्रति किलो के बीच रहता है, हालांकि यह स्थानीय आपूर्ति और मौसम पर निर्भर करता है। नियमित खरीदारों के कारण उन्हें अपनी उपज बेचने में ज्यादा कठिनाई नहीं होती।
खेती की तैयारी और रोपाई की विधि
खेती की शुरुआत जमीन की अच्छी तैयारी से होती है। किसान के अनुसार, पहले खेत की दो बार जुताई कर मिट्टी को भुरभुरा बनाया जाता है। इसके बाद रोटावेटर चलाकर सतह समतल की जाती है ताकि पौधों की जड़ें आसानी से फैल सकें।
बेड तैयार करते समय एक बेड से दूसरे बेड के बीच लगभग तीन फीट की दूरी रखी जाती है। इससे सिंचाई और निराई-गुड़ाई में सुविधा रहती है। बेड बनने के बाद ड्रिप सिंचाई लाइन बिछाई जाती है, जिससे पानी की बचत होती है और पौधों को आवश्यक नमी मिलती रहती है।
पौधों की रोपाई के समय पौधे से पौधे के बीच करीब एक फीट की दूरी रखी जाती है। मेड़ के दोनों किनारों पर पौधे लगाए जाते हैं। रोपाई से पहले पौधशाला में तैयार किए गए पौधों को तब लगाया जाता है, जब वे पर्याप्त मजबूत हो जाते हैं।
खाद और पोषण प्रबंधन
उत्पादन बढ़ाने के लिए खेत में गोबर की खाद का प्रयोग किया जाता है। इसके साथ संतुलित मात्रा में यूरिया और पोटाश का उपयोग किया जाता है। किसान का मानना है कि जैविक खाद से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है।
फूलगोभी में सामान्यतः रोगों का प्रकोप ज्यादा नहीं होता, लेकिन पत्ता छेदक की समस्या कभी-कभी सामने आती है। इससे बचाव के लिए कृषि विशेषज्ञों की सलाह लेकर दवा का छिड़काव किया जाता है। समय पर निगरानी और उपचार से नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है।
लागत और संभावित आमदनी
चैतन कश्यप के अनुसार, एक एकड़ में फूलगोभी उगाने पर करीब 40 से 45 हजार रुपये तक की लागत आती है। इसमें बीज, खाद, श्रम और सिंचाई सहित अन्य खर्च शामिल हैं। फसल लगभग 60 दिनों में तैयार हो जाती है और बिक्री शुरू हो जाती है।
यदि बाजार में अनुकूल भाव मिल जाए तो डेढ़ से दो लाख रुपये तक का मुनाफा संभव है। हालांकि आय पूरी तरह बाजार दर पर निर्भर करती है। बेहतर दाम मिलने की स्थिति में लाभ और भी बढ़ सकता है। कम अवधि में इतनी आय मिलने के कारण यह खेती क्षेत्र के युवाओं के लिए भी आकर्षक विकल्प बन रही है।
स्थानीय किसानों के लिए उदाहरण
बस्तर में कई किसान अब सब्जी उत्पादन की ओर रुख कर रहे हैं। चैतन कश्यप का अनुभव बताता है कि सही तकनीक और योजना के साथ छोटी अवधि की फसलें बेहतर परिणाम दे सकती हैं। कृषि विशेषज्ञ भी किसानों को फसल विविधीकरण की सलाह दे रहे हैं, ताकि आय के स्रोत बढ़ाए जा सकें।
फूलगोभी की खेती ने यह साबित किया है कि यदि जमीन की सही तैयारी, संतुलित पोषण और बाजार की समझ हो तो सीमित संसाधनों में भी अच्छी कमाई की जा सकती है।

