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Rooftop Gardening Success story – दरभंगा में छतों पर उग रही ताजी हरी सब्जियों की नई पहल

Rooftop Gardening Success story – स्वस्थ जीवन के लिए ताजी हरी सब्जियों का सेवन जरूरी माना जाता है और डॉक्टर भी इसकी सलाह देते हैं। हालांकि, शहरी इलाकों में शुद्ध और ताजी सब्जियां मिलना कई बार चुनौती बन जाता है। बाजार से मिलने वाली सब्जियों में कीटनाशकों के इस्तेमाल को लेकर लोगों की चिंता बढ़ी है। ऐसे में दरभंगा शहर के कुछ परिवारों ने इसका सरल और टिकाऊ समाधान खोज लिया है। वे अपने घर की छत पर ही हरी सब्जियां उगाकर न सिर्फ ताजा भोजन पा रहे हैं, बल्कि खर्च भी बचा रहे हैं।

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छत पर सब्जी उगाने का बढ़ता चलन

दरभंगा में अब छतों का इस्तेमाल सिर्फ कपड़े सुखाने या टंकी रखने तक सीमित नहीं रहा। शहर के कई लोग अपनी छत को छोटे बगीचे में बदल रहे हैं। यहां बिना रासायनिक खाद और कीटनाशक के साग-सब्जियां उगाई जा रही हैं। इससे परिवार को रोजाना ताजी सब्जियां मिल जाती हैं और यह भरोसा भी रहता है कि भोजन पूरी तरह सुरक्षित है।

गृह स्वामी ने अपनाया सरल तरीका

दरभंगा के गृह स्वामी अम्बेश कुमार ने अपने घर की छत पर हरी सब्जियों के साथ तुलसी के पौधे भी लगाए हैं। उन्होंने छत पर मचान बनाकर कदिमा की बेल उगाई है, जिससे पूरे साल ताजी हरी पत्तियां मिलती रहती हैं। मचान के नीचे मिर्च का पौधा लगाया गया है, जो आकार में बड़ा होने के साथ लगातार फल दे रहा है। सीमित जगह में उन्होंने कई पौधों को सफलतापूर्वक उगाया है।

बिना बोए अपने आप उगे पौधे

अम्बेश कुमार बताते हैं कि उन्होंने गांव से चार बोरी मिट्टी और दो बोरी गाय का गोबर लाकर छत पर रखा था। इन गमलों या मिट्टी में उन्होंने कोई खास खेती की योजना नहीं बनाई थी। घर में कदिमा आया तो उसके बीज फेंक दिए गए और मिर्च के बीज भी वहीं डाल दिए गए। कुछ समय बाद दोनों पौधे अपने आप उग आए। आज ये पौधे लगभग एक साल पुराने हो चुके हैं और लगातार उत्पादन दे रहे हैं।

साल भर मिलती है ताजी सब्जी

छत पर लगे मचान से कदिमा की हरी पत्तियां पूरे वर्ष मिलती हैं। नीचे लगा मिर्च का पौधा भी अच्छी मात्रा में फल दे रहा है। परिवार जब चाहे, ताजी पत्तियां तोड़कर सब्जी बना लेता है। इससे बाजार पर निर्भरता कम हुई है और खाने की गुणवत्ता भी बेहतर हुई है।

खर्च में बचत और सेहत को फायदा

घर पर सब्जियां उगाने से न केवल पैसे की बचत होती है, बल्कि स्वास्थ्य को भी लाभ मिलता है। अम्बेश कुमार का कहना है कि बाजार की सब्जियों में इस्तेमाल होने वाले रसायनों की चिंता अब नहीं रहती। घर के सभी सदस्य ताजी और सुरक्षित सब्जियां खा पाते हैं। खास बात यह है कि इसके लिए किसी बड़ी लागत या तकनीकी जानकारी की जरूरत नहीं पड़ी।

हर व्यक्ति अपना सकता है यह तरीका

गृह स्वामी का मानना है कि यह तरीका बेहद आसान है और कोई भी व्यक्ति इसे अपना सकता है। थोड़ी सी मिट्टी, जैविक खाद और धैर्य के साथ छत या बालकनी में सब्जियां उगाई जा सकती हैं। इसके लिए ज्यादा जगह की भी जरूरत नहीं होती।

पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद

विशेषज्ञों की राय में घर पर हरी सब्जियां उगाना न केवल सेहत के लिए लाभकारी है, बल्कि पर्यावरण के लिहाज से भी अच्छा कदम है। इससे हरियाली बढ़ती है, तापमान संतुलित रहता है और रासायनिक खेती पर निर्भरता कम होती है। शहरी क्षेत्रों में यह पहल लोगों को प्रकृति से जोड़ने का भी काम कर रही है।

शहरों में बढ़ सकती है यह पहल

दरभंगा में यह प्रयास अब अन्य लोगों के लिए प्रेरणा बन रहा है। आसपास के लोग भी इस तरह की छत बागवानी को अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं। यदि यह चलन आगे बढ़ता है, तो शहरी जीवन में ताजा और सुरक्षित भोजन की समस्या काफी हद तक हल हो सकती है।

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