GOVERNMENT SCHEMES

Mushroom Farmer Subsidy Scheme – जहानाबाद में किसानों की आय बढ़ाने का बन रहा है मजबूत जरिया

Mushroom Farmer Subsidy Scheme – बिहार में खेती को लाभकारी बनाने की दिशा में सरकार लगातार नए विकल्पों को बढ़ावा दे रही है। इसी क्रम में मशरूम उत्पादन को किसानों की आमदनी बढ़ाने का एक भरोसेमंद साधन माना जा रहा है। बागवानी विभाग की सक्रिय पहल का असर अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। जहानाबाद जिले में मशरूम उत्पादन तेजी से फैल रहा है और कई किसान इससे स्थायी आय अर्जित कर रहे हैं।

Mushroom farming boosts farmers income jehanabad

मशरूम उत्पादन को लेकर विभाग की सक्रिय भूमिका

राज्य सरकार के बागवानी विभाग ने मशरूम उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए न केवल आर्थिक सहायता की व्यवस्था की है, बल्कि तकनीकी मार्गदर्शन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। किसानों को यह बताया जा रहा है कि किस प्रकार वैज्ञानिक तरीके से मशरूम की खेती की जाए, ताकि उत्पादन बेहतर हो और नुकसान की संभावना कम रहे। विभाग की यह रणनीति किसानों के बीच भरोसा पैदा कर रही है।

जहानाबाद में बढ़ रहा है व्यावसायिक उत्पादन

जहानाबाद जिले में अब मशरूम केवल छोटे स्तर तक सीमित नहीं है। यहां बड़े पैमाने पर उत्पादन करने वाली इकाइयां स्थापित हो चुकी हैं। कुछ प्लांट ऐसे हैं जहां स्पॉन तैयार करने से लेकर मशरूम उगाने तक की पूरी प्रक्रिया एक ही स्थान पर की जा रही है। इन इकाइयों से जुड़े किसान अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं, जिससे अन्य लोग भी इस खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

बटन मशरूम की सबसे अधिक मांग

जिला उद्यान कार्यालय में पदस्थापित सहायक निदेशक उद्यान रूपेश कुमार अग्रवाल के अनुसार, मशरूम की कई किस्में मौजूद हैं, लेकिन बाजार में सबसे अधिक मांग बटन मशरूम की रहती है। होटल, रेस्टोरेंट और शहरी बाजारों में इसकी खपत अधिक है। हालांकि, बटन मशरूम की खेती के लिए नियंत्रित तापमान और वातानुकूलित संरचना की आवश्यकता होती है।

मशरूम उत्पादन का पूरा ढांचा

बटन मशरूम उत्पादन के लिए तीन प्रमुख संरचनाओं की जरूरत होती है। इसमें मशरूम स्पॉन लैब, कंपोस्ट यूनिट और वातानुकूलित मशरूम उत्पादन इकाई शामिल हैं। इन तीनों को अलग-अलग स्थानों पर भी स्थापित किया जा सकता है। सही ढांचे के साथ उत्पादन करने पर गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता दोनों में सुधार होता है।

सरकार दे रही है लाखों की सब्सिडी

बागवानी विभाग की योजना के तहत किसानों को इन संरचनाओं पर भारी अनुदान दिया जा रहा है। मशरूम स्पॉन लैब की स्थापना पर लगभग 20 लाख रुपये की लागत आती है, जिसमें 40 प्रतिशत यानी करीब 8 लाख रुपये की सब्सिडी मिलती है। कंपोस्ट यूनिट के लिए 30 लाख रुपये की लागत पर 12 लाख रुपये का अनुदान दिया जाता है। इसी तरह वातानुकूलित मशरूम उत्पादन इकाई पर भी 30 लाख रुपये खर्च होते हैं और इस पर भी 12 लाख रुपये की सहायता मिलती है। कुल मिलाकर 80 लाख रुपये की परियोजना पर 32 लाख रुपये की सब्सिडी उपलब्ध है।

बैंक लोन से जुड़ी है योजना

यह सहायता बैंक-एंडेड सब्सिडी के रूप में दी जाती है। यानी लाभ लेने के लिए पहले बैंक से ऋण स्वीकृत कराना अनिवार्य है। इसके लिए किसान को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करनी होती है, जिसके आधार पर बैंक लोन मंजूर करता है। लोन स्वीकृत होने के बाद ही अनुदान की प्रक्रिया शुरू होती है।

कौन किसान उठा सकता है लाभ

इस योजना का लाभ वही किसान ले सकते हैं जिनके पास अपनी जमीन है। भूमिहीन किसान इस योजना के पात्र नहीं हैं। विभाग का मानना है कि जमीन होने से परियोजना की स्थिरता बनी रहती है और उत्पादन लंबे समय तक जारी रह सकता है।

आय बढ़ाने का बन रहा भरोसेमंद विकल्प

मशरूम उत्पादन कम समय में तैयार होने वाली और अच्छी कीमत दिलाने वाली फसल के रूप में उभर रहा है। जहानाबाद में इसके बढ़ते उदाहरण यह दिखा रहे हैं कि यदि सही मार्गदर्शन और सरकारी सहयोग मिले, तो किसान पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर बेहतर आमदनी हासिल कर सकते हैं।

Back to top button