AGRICULTURE

Vegetable Farming – लखीमपुर खीरी में किसानों की आमदनी बढ़ा रही है कद्दू की खेती

Vegetable Farming – उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में खेती की तस्वीर धीरे-धीरे बदल रही है। यहां के किसान अब केवल धान, गेहूं और गन्ने जैसी पारंपरिक फसलों पर निर्भर नहीं रह गए हैं, बल्कि सब्जी उत्पादन को अपनाकर अपनी आमदनी के नए रास्ते तलाश रहे हैं। सालभर बाजार में मांग बने रहने के कारण सब्जियों की खेती किसानों के लिए स्थिर और भरोसेमंद आय का साधन बनती जा रही है। इसी बदलाव की एक मिसाल अमेठी गांव के युवा किसान शानू खान हैं, जिन्होंने कद्दू की खेती से बेहतर मुनाफा हासिल किया है।

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चार बीघे में कद्दू की उन्नत खेती का प्रयोग

अमेठी गांव निवासी शानू खान बताते हैं कि उनके क्षेत्र में लंबे समय से सब्जियों की खेती होती रही है। आसपास के किसानों की सफलता देखकर उन्होंने भी परंपरागत खेती से हटकर सब्जी उत्पादन की ओर कदम बढ़ाया। वर्तमान में वे चार बीघे भूमि में कद्दू की एक उन्नत किस्म की खेती कर रहे हैं, जिसमें कुल 56 पौधे लगाए गए हैं। यह किस्म खास तौर पर ठंड के मौसम में बेहतर उत्पादन देती है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, कद्दू की खेती के लिए दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है, क्योंकि इसमें जल निकास और पोषक तत्वों का संतुलन अच्छा रहता है।

कम लागत में लगातार हो रहा उत्पादन

किसान शानू खान के अनुसार, कद्दू की खेती में लागत अपेक्षाकृत कम आती है। एक बीघा में करीब आठ हजार रुपये का खर्च होता है, जिसमें बीज, खाद, सिंचाई और देखभाल शामिल है। इसके मुकाबले उत्पादन और बिक्री से मिलने वाली आमदनी कहीं अधिक है। वर्तमान समय में वे प्रतिदिन चार से पांच कुंतल तक कद्दू का उत्पादन कर रहे हैं। मंडी में कद्दू की थोक कीमत करीब बीस रुपये प्रति किलो मिल रही है, जबकि खुदरा बाजार में यही कद्दू तीस से चालीस रुपये प्रति किलो तक बिक जाता है।

बीज बिक्री से भी बढ़ रही आय

कद्दू की खेती का एक अतिरिक्त फायदा यह है कि इसके बीजों की भी बाजार में अच्छी मांग रहती है। शानू खान बताते हैं कि फसल के साथ-साथ बीज बेचकर भी किसानों को अतिरिक्त आमदनी मिल सकती है। इस तरह कद्दू की खेती किसानों के लिए दोहरा लाभ देने वाली साबित हो रही है। बीजों की बिक्री से होने वाली आय लागत को और कम कर देती है, जिससे कुल मुनाफा बढ़ जाता है।

मल्चिंग तकनीक से बेहतर गुणवत्ता

शानू खान अपनी खेती में मल्चिंग विधि का उपयोग कर रहे हैं। इस तकनीक से खेतों में खरपतवार की समस्या काफी हद तक खत्म हो जाती है और मिट्टी में नमी लंबे समय तक बनी रहती है। इसके अलावा सिंचाई में पानी की खपत भी कम होती है। मल्चिंग के कारण कद्दू के फल साफ और एकसमान आकार के तैयार होते हैं, जिससे बाजार में उनकी मांग और कीमत दोनों बढ़ जाती हैं। किसान मानते हैं कि आधुनिक तकनीकों को अपनाने से सब्जी खेती और अधिक लाभकारी बन सकती है।

नगदी फसलों की ओर बढ़ता किसानों का रुझान

पिछले तीन वर्षों से सब्जी उत्पादन कर रहे शानू खान का अनुभव बताता है कि धान, गेहूं और गन्ने जैसी फसलों की तुलना में सब्जियों से जल्दी और अधिक मुनाफा मिलता है। यही वजह है कि क्षेत्र के कई किसान अब नगदी फसलों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। कद्दू की खेती लखीमपुर खीरी के किसानों के लिए आय बढ़ाने का एक प्रभावी विकल्प बनकर उभर रही है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में अहम भूमिका निभा रही है।

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