Shivpuri Farmer Success Story: शिवपुरी के किसान ने गेंदा खेती से बदली किस्मत, एक बीघा में लाखों कमाई
Shivpuri Farmer Success Story: शिवपुरी जिले में आज भी बड़ी संख्या में किसान पारंपरिक खेती पर निर्भर हैं, जिससे उनकी आमदनी सीमित रह जाती है और परिवार की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना कई बार मुश्किल हो जाता है। हालांकि अब धीरे-धीरे हालात बदल रहे हैं। जिले के कुछ प्रगतिशील किसान पारंपरिक फसलों को छोड़कर उन्नत कृषि तकनीक और Cash Crop Farming की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी शिवपुरी जिले के सालौदा गांव के किसान मोंटी कुशवाहा की है, जिन्होंने गेंदा की खेती करके कम जमीन में शानदार मुनाफा कमाकर नई मिसाल कायम की है।

पारंपरिक खेती छोड़ नगदी फसल की ओर कदम
सालौदा गांव के किसान मोंटी कुशवाहा बताते हैं कि पहले वे भी अन्य किसानों की तरह गेहूं, चना और सोयाबीन जैसी पारंपरिक फसलें उगाते थे। लेकिन इन फसलों से लागत निकालना भी कई बार मुश्किल हो जाता था। इसी कारण उन्होंने खेती में बदलाव करने का फैसला लिया और Marigold Farming यानी गेंदा की खेती की ओर रुख किया। मोंटी ने केवल 1 बीघा जमीन में गेंदा की खेती शुरू की और कुछ ही महीनों में अच्छा परिणाम देखने को मिला।
एक बीघा में 1 से डेढ़ लाख रुपये की कमाई
मोंटी कुशवाहा के अनुसार, उन्होंने गेंदा की खेती से लगभग 1 से 1.5 लाख रुपये तक की आमदनी हासिल की है। उनका कहना है कि इस फसल में न तो ज्यादा लागत आती है और न ही ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। फूलों की बाजार में हमेशा मांग बनी रहती है, जिससे बिक्री में भी कोई परेशानी नहीं होती। नियमित तुड़ाई से लगातार आमदनी मिलती रहती है, जो पारंपरिक खेती की तुलना में कहीं ज्यादा फायदेमंद है।
कम लागत और आसान देखभाल
गेंदा की खेती की खास बात यह है कि इसमें ज्यादा खाद, कीटनाशक और सिंचाई की जरूरत नहीं होती। मोंटी बताते हैं कि अगर सही समय पर निराई-गुड़ाई कर दी जाए और हल्की सिंचाई होती रहे, तो फसल अच्छी तरह बढ़ती है। यही वजह है कि इस खेती में जोखिम भी कम होता है और लाभ ज्यादा मिलता है।
अन्य किसानों के लिए बनी प्रेरणा
मोंटी कुशवाहा की सफलता को देखकर अब सालौदा गांव के अन्य किसान भी पारंपरिक खेती छोड़कर नगदी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। किसानों का मानना है कि अगर जमीन कम है लेकिन मेहनत करने का जज्बा और नई तकनीक अपनाने की सोच है, तो खेती से अच्छी आमदनी संभव है। यह कहानी उन किसानों के लिए खास है, जो कम जमीन में अधिक मुनाफा कमाने की योजना बना रहे हैं।
कैसे करें गेंदा की खेती
गेंदा की खेती के लिए सबसे पहले अच्छी जल निकास वाली दोमट मिट्टी का चयन करना जरूरी होता है। खेत को 2 से 3 बार जुताई करके मिट्टी को भुरभुरा बनाया जाता है। इसके बाद गोबर की सड़ी खाद या Vermi Compost मिलाई जाती है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है।
नर्सरी में तैयार पौधों को 30×30 सेंटीमीटर की दूरी पर रोपाई की जाती है। रोपाई के समय हल्की सिंचाई जरूरी होती है। गेंदा की फसल में ज्यादा दवाइयों की आवश्यकता नहीं होती, जिससे लागत काफी कम रहती है। समय-समय पर निराई-गुड़ाई करने से पौधों की बढ़वार बेहतर होती है।
कितने दिनों में तैयार हो जाती है फसल
गेंदा एक जल्दी तैयार होने वाली Cash Crop है। रोपाई के लगभग 45 से 50 दिनों के भीतर पौधों में फूल आना शुरू हो जाता है। करीब 60 से 70 दिनों में फसल पूरी तरह उत्पादन देने लगती है। कम समय में तैयार होने के कारण किसान साल में एक से अधिक बार गेंदा की खेती कर सकते हैं या इसके बाद दूसरी फसल भी ले सकते हैं।
कब तक मिलते हैं फूल और कैसे होती है तुड़ाई
गेंदा की खेती में फूलों की आमद लंबे समय तक बनी रहती है। एक बार फूल आना शुरू हो जाए तो लगभग 2 से 3 महीने तक लगातार तुड़ाई की जा सकती है। हर 3 से 4 दिन में फूल तोड़ने से नई कलियों का विकास होता रहता है। इससे उत्पादन बढ़ता है और आमदनी भी लगातार बनी रहती है।
बाजार भाव कम फिर भी मुनाफा ज्यादा
स्थानीय बाजार छोटा होने के कारण गेंदा के फूलों का भाव ज्यादा नहीं मिल पाता और औसतन 22 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक्री होती है। इसके बावजूद किसानों को अच्छा मुनाफा हो जाता है, क्योंकि लागत बेहद कम होती है और उत्पादन लंबे समय तक मिलता रहता है। एक बीघा में कुल खर्च निकालने के बाद भी किसान 1 से डेढ़ लाख रुपये तक की शुद्ध कमाई कर लेते हैं।
कम जमीन वाले किसानों के लिए फायदेमंद खेती
गेंदा की खेती उन किसानों के लिए खास तौर पर फायदेमंद साबित हो रही है, जिनके पास जमीन कम है। यह खेती कम समय, कम लागत और नियमित आमदनी देने वाली है। शिवपुरी के किसान मोंटी कुशवाहा की यह सफलता साबित करती है कि सही फसल चयन और मेहनत से खेती को मुनाफे का सौदा बनाया जा सकता है।

